एतिहासिक रहा टांटिया समूह का गंगानगर किन्नू फेस्टिवल-2026 

किन्नू से गंगानगर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान: डॉ. मोहित टांटिया

श्रीगंगानगर। अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर श्रीगंगानगर को पहचान दिलाने वाले किन्नू को और अधिक लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से टांटिया समूह की ओर से टांटिया यूनिवर्सिटी कैम्पस में आयोजित गंगानगर किन्नू फेस्टिवल-2026 (जीकेएफ) अत्यंत सफल रहा। पहली ही बार आयोजित जीकेएफ ने ऐतिहासिक सफलता के साथ नए आयामों को छू लिया। किन्नू उत्पादकों, विद्यार्थियों, कृषि आदानों के व्यापारियों एवं आमजन के लिए यह आयोजन मील का पत्थर साबित हुआ। फेस्टिवल में लाइफटाइम अवार्ड और किन्नू रत्न सम्मान भी दिए गए।
जीकेएफ का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय बीज प्रमुख कृष्ण मुरारी, जिला संघ चालक अमरचंद बोरड़, यूनिवर्सिटी चेयरपर्सन श्रीमती सुनीता टांटिया, वाइस चेयरपर्सन डॉ. मोहित टांटिया, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. नेहा टांटिया, आर्किटेक्ट अमीषा टांटिया, शिक्षाविद् स्नेहा चाचाण,सीए निशित अग्रवाल, वरिष्ठ किन्नू वैज्ञानिक डॉ. एम.के. कौल एवं किन्नू व्यापारी मूलचंद गेरा ने गणेश जी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित करके किया। गुब्बारे उड़ाकर किन्नू विकास का संदेश दिया गया। पूरे पंडाल को किन्नू के केसरिया रंग में रंगा गया था। शहर के युवा राघव लीला ने किन्नू की शेप में केक का निर्माण किया। इसे अतिथियों ने मिलकर काटा। युवा आईकन के रूप में डॉ. मोहित टांटिया को विशेष रूप से किन्नू का सम्मान प्रतीक भेंट करके सम्मानित किया गया।
सबसे पहले जीकेएफ के संरक्षक डॉ. मोहित टांटिया ने स्वागत करते हुए किन्नू की महत्ता पर प्रकाश डाला और इस तरह के आयोजन प्रतिवर्ष करवाने की बात कही। उन्होंने कहा कि किन्नू से गंगानगर की पहचान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बनी है। यह इलाके के लिए आर्थिक एवं कृषि के क्षेत्र में रीढ़ की हड्डी साबित हुआ है।
मुख्य अतिथि कृष्ण मुरारी ने कहा कि श्रीगंगानगर में किन्नू फेस्टिवल की शुरुआत किन्नू उत्पादकों की उन्नति के लिए नए रास्ते खोलेगी। उन्होंने भूमिपुत्रों की समस्याओं की चर्चा करते हुए कहा कि भारत में कृषकों के सामने बीज की बड़ी भारी समस्या है। कई जगह तो नकली बीज बिक रहा है तो कहीं बहुत महंगा हो रहा है। ऐसे में अगर विश्वविद्यालयों के कृषि संकाय और कृषि अनुसंधान केंद्र बीज निर्माण की पहल करें और अपने क्षेत्र की जल-वायु के हिसाब से जितना बीज चाहिए, उतना उचित दाम पर उपलब्ध करवाएं तो इस समस्या से निजात पाई जा सकती है।
विशिष्ट अतिथि अमरचंद बोरड़ ने महाराजा गंगासिंह की दूरदृष्टि की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से ही आज यहां की रेतीली धरती सोना उगल रही है।
उद्घाटन सत्र के अलावा डॉ. अलका के निर्देशन में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ। इसमें कृषि संकाय के विद्यार्थियों ने हिंदी, पंजाबी, राजस्थानी एवं हरियाणवी संस्कृति से ओतप्रोत कार्यक्रम प्रस्तुत किया। तकनीकी सत्र में डॉ. एम.के. कौल, डॉ. अमरसिंह पूनिया, कानाराम भुंवाल, मदन जोशी, डॉ. राजेंद्र नैण ने किन्नू उत्पादन व गुणवत्ता बढ़ाने और फसल सुधार के लिए विस्तार से जानकारी दी। जादूगर प्रशांत ने अपना मायाजाल भी दिखाया। अतिथियों ने बड़ी संख्या में लगी स्टॉल्स का अवलोकन किया और वहां प्रदर्शित उत्पादों की सराहना की।
आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. उम्मेदसिंह शेखावत, सदस्य योगेंद्र शर्मा ने भी संबोधित किया। आभार सदस्य कमलजीतसिंह सूदन ने व्यक्त किया। मंच संचालन आयोजन सचिव राजकुमार जैन व कृष्णकुमार आशु ने किया।
डॉ. एम.के. कौल को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.के. कौल को किन्नू के लिए किए गए प्रयासों के दृष्टिगत लाइफटाइम अवार्ड दिया गया। उन्हें अतिथियों एवं आयोजन समिति सदस्यों ने सम्मान प्रतीक भेंट करके सम्मानित किया। इस मौके पर लायलपुर फार्म हाउस के मनमोहनसिंह नरूला, कृषि पंडित बलवंतसिंह के पौत्र एडवाकेट बिक्रमसिंह, आनंदसिंह कंग व मूलचंद गेरा को किन्नू रत्न सम्मान दिया गया। अतिथियों के साथ आयोजन समिति अध्यक्ष डॉ. उम्मेदसिंह शेखावत, सचिव राजकुमार जैन तथा सदस्य डॉ. मुकेश बिश्नोई, सुरेश बुडानिया, सुनील सिहाग, कमलजीतसिंह सूदन व योगेंद्र शर्मा ने इन्हें सम्मानित किया।

ये रहे विजेता
किन्नू क्वालिटी प्रतियोगिता में हनुमान प्रथम, अमित सहारण द्वितीय और शीशपाल तृतीय रहे। किन्नू खाओ प्रतियोगिता में निखिल और योगेश प्रथम, अंकित द्वितीय, प्रकाश तृतीय रहे। शीशपाल को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। किन्नू रेस में ललिता प्रथम, लखविंद्रकौर द्वितीय और सना तृतीय रहे। किन्नू लेखन प्रतियोगिता में प्रकाश को प्रथम, कृष्णकांत को द्वितीय व आयुष खान और घनश्याम को तृतीय स्थान मिला। पोस्टर मेकिंग में कीर्ति शर्मा प्रथम, जिया मल्होत्रा, शीतल राजावत और विजयलक्ष्मी द्वितीय तथा मीमांशा शर्मा और सोनू खन्ना तृतीय रहे। नवाचार प्रतियोगिता में बेकिंग ड्रीम्स के राघव लीला प्रथम व ओमेगा ब्रांड के पवनकुमार द्वितीय रहे। डॉ. अरुण कुमार सी.पवार व मुदित जैन को चित्र प्रदर्शनी के लिए पुरस्कृत किया गया। मॉडल निर्माण में राजेंद्र, विष्णु, प्रीतल, हिमांशु, शुभम, विनय, शताक्षी, दीपिका, शौर्य और योगेश को पुरस्कृत किया गया। लक्की ड्रॉ में मनिक मिड्ढा को पुरस्कृत किया गया। दीपक कुक्कड़, डॉ. सीमा चावला, डॉ. रामस्वरूप पूनिया, डॉ. राजेंद्र नैण, डॉ. अमरसिंह पूनिया, लेफ्टिनेंट संदीप भांभू, श्रेया धींगड़ा, अमित कुमार, सरिता शर्मा, डॉ. मुकेश बिश्नोई विभिन्न प्रतियोगिताओं के निर्णायक रहे। इन सभी को अतिथियों के साथ टांटिया समूह के महाप्रबंधक डॉ. विकास सचदेवा, एजीएम अर्शिया सेतिया व मनीष सचदेवा तथा डिप्टी रजिस्ट्रार राकेश वर्मा ने पुरस्कृत किया।

ये रहे मौजूद
सहकारी विभाग के डिप्टी रजिस्ट्रार दीपक कुक्कड़, उद्योग विभाग के सहायक आयुक्त दिनेश राजपुरोहित, राजकीय कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ. बीएस मीणा, पूर्व पीएमओ डॉ. दीपक मोंगा, राजीविका के प्रबंधक चंद्रशेखर, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष अंकुर मगलानी, भाजपा के जिला मंत्री क्रांति चुघ, अरोड़वंश सभा के सचिव सीए नीरज चावला, रीको इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व सचिव सुनील अग्रवाल, अश्मितसिंह नरूला, जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय में बोम सदस्य सुशील बोरड़, पंचायत समिति के पूर्व प्रधान हरभगवान सिंह बराड़, किसान संघ के जिलाध्यक्ष बलदेवसिंह, बार संघ के उपाध्यक्ष एडवोकेट अरमान सेतिया, पेस्टीसाइड डीलर एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दलीप बोरड़, संदीप अनेजा, ट्रेडर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अमरसिंह मंडा, कच्चा आढ़तिया संघ के पूर्व मंत्री राकेश बोरड़, डॉ. ऋचा कुक्कड़, डॉ. मुकेश नंदा, जन सेवा हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ.एचएस बिंद्रा, टांटिया विश्वविद्यालय के डॉ. सौरभ गर्ग, डॉ. आरपीएस बघेल, डॉ. रिशु शर्मा, डॉ. सुभाष उपाध्याय, डॉ. रेखा सोनी, मुकेश साहू, जयनारायण पुरोहित, विकास रांगेरा, नितेश वर्मा सहित बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि और विद्यार्थी मौजूद रहे।