श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय का 23वां स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से आयोजित

श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय का 23वां स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से आयोजित

विश्वविद्यालय इमारतों से नहीं, विचारों, सपनों और संभावनाओं से बनता है : उपराज्यपाल मनोज सिन्हा

जम्मू। श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय के 23वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन बुधवार को गरिमापूर्ण वातावरण में किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल इमारतों से नहीं बनता, बल्कि विचारों, सपनों, नवाचार और नई संभावनाओं से उसकी पहचान बनती है। उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों से विद्यार्थियों को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार और अवसर पैदा करने वाला बनाने का आह्वान किया।

उपराज्यपाल ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की वास्तविक शक्ति उसके दूरदर्शी नेतृत्व, समर्पित शिक्षकों और जिज्ञासु विद्यार्थियों में निहित होती है। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में विनम्रता, संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और समाज के प्रति दायित्व की भावना विकसित करना भी है।

उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री माता वैष्णो देवी के आशीर्वाद से स्थापित यह विश्वविद्यालय आज ज्ञान, नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यहां के शिक्षकों ने लगभग 140 शोध परियोजनाएं हासिल की हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग वाली परियोजनाएं भी शामिल हैं। विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डीप लर्निंग प्रयोगशाला स्थापित की गई है। इसके अलावा विश्वविद्यालय को 14 पेटेंट प्राप्त हुए हैं और 30 स्टार्टअप को विकसित करने में मदद मिली है।

उपराज्यपाल ने विश्वविद्यालय से उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच संबंधों को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने पेटेंट और शोध उपलब्धियों को व्यावहारिक रूप देने के लिए खुले संवाद और उद्योग जगत के साथ नियमित बैठकें आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों की सफलता ही विश्वविद्यालय की असली पहचान

मनोज सिन्हा ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की सफलता का वास्तविक पैमाना उसकी इमारतें या सुविधाएं नहीं, बल्कि उसके विद्यार्थी और पूर्व छात्र होते हैं। विद्यार्थी जब समाज और राष्ट्र के विकास में अपना योगदान देते हैं, तभी विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और उपलब्धियां सार्थक होती हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार की शोध एवं नवाचार संबंधी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश में युवाओं को शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति से शिक्षकों और चयनित विद्यार्थियों की एक विशेष टीम गठित कर अधिक से अधिक शोध प्रस्ताव तैयार करने और राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं में भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा।

शिक्षा सबसे शक्तिशाली निवेश

उपराज्यपाल ने कहा कि शिक्षा किसी विश्वविद्यालय, समाज और राष्ट्र के लिए सबसे शक्तिशाली निवेश है। उन्होंने भारतीय विश्वविद्यालयों को शोध, नवाचार, नेतृत्व और उद्यमिता के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि आज विश्वविद्यालयों के सामने सीमित शोध, शिक्षकों की कमी, जवाबदेही की कमी और उद्योग जगत से कमजोर संबंध जैसी चुनौतियां हैं। संस्थानों को यह सोचने की जरूरत है कि केवल ?हमें क्या पढ़ाना है? तक सीमित रहने के बजाय यह सवाल किया जाए कि ?हमें समाज की किन समस्याओं का समाधान करना है।?

उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी, रचनात्मक क्षमता और जोखिम उठाने का साहस देश की सबसे बड़ी ताकत है। विश्वविद्यालयों को इसी ऊर्जा को अवसरों में बदलना होगा और विद्यार्थियों को अवसरों के निर्माता के रूप में तैयार करना होगा।

वर्ष 2040 के लिए विश्वविद्यालय का व्यापक विजन

उपराज्यपाल ने श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय के लिए वर्ष 2040 तक का व्यापक दृष्टिकोण सामने रखते हुए इसे वैश्विक स्तर के ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और जलवायु विज्ञान जैसे क्षेत्रों में अत्याधुनिक शोध सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण क्षेत्रों तक डिजिटल शिक्षा नेटवर्क पहुंचाने, अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी विनिमय कार्यक्रमों को बढ़ावा देने तथा वैश्विक संस्थानों के साथ सहयोग मजबूत करने का आह्वान किया।

शिक्षा का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं

मनोज सिन्हा ने कहा कि शिक्षा का अंतिम उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं है। शिक्षा ऐसे रचनात्मक और जिम्मेदार इंसान तैयार करे, जो स्वयं को समझें, प्रकृति का सम्मान करें और मानवता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पहचानें।

उन्होंने विश्वविद्यालय से आधुनिक शिक्षा को मानवीय मूल्यों के साथ जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय को ज्ञान की तीर्थस्थली, नवाचार की प्रयोगशाला और समाज को प्रगति की दिशा दिखाने वाले प्रकाशस्तंभ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

उन्होंने खेल, कला, साहित्य, वाद-विवाद और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया। साथ ही ग्रामीण समुदायों के साथ जुड़कर सतत विकास की दिशा में कार्य करने और उद्योगों के साथ साझेदारी तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

उपराज्यपाल ने कटड़ा में प्रस्तावित अत्याधुनिक मां के अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय की स्थापना के लिए विभिन्न हितधारकों से सुझाव भी आमंत्रित किए।

स्वयं सहायता समूह की बेकरी इकाई का उद्घाटन

समारोह के अवसर पर उपराज्यपाल ने श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय परिसर में स्वयं सहायता समूह की बेकरी इकाई का उद्घाटन भी किया। उन्होंने इसे महिला सशक्तीकरण, स्वरोजगार और स्थानीय स्तर पर अवसरों के सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

समारोह में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के सदस्य डॉ. अशोक भान, सुरेश कुमार शर्मा और गुंजन राणा, उपराज्यपाल के प्रधान सचिव डॉ. मंदीप कुमार भंडारी, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रगति कुमार, जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक भीम सेन टूट्टी, जम्मू के मंडलायुक्त रमेश कुमार, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिन कुमार वैश्य, उधमपुर-रियासी रेंज के उपमहानिरीक्षक शिव कुमार शर्मा, रियासी के उपायुक्त कुमार अभिषेक सहित विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के सदस्य, विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रमुख, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।