सियालदह स्टेशन पर विभाजन पीड़ितों के स्मारक के लिए हुआ भूमि पूजन, स्मृति और संघर्ष की कहानी होगी जीवंत

कोलकाता। भारत विभाजन के पीड़ितों की स्मृति को समर्पित स्मारक प्रतिमा की स्थापना के लिए शुक्रवार को सियालदह रेलवे स्टेशन पर भूमि पूजन समारोह आयोजित किया गया। संस्कृति मंत्रालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम में रेलवे और पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

प्रस्तावित स्मारक वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान विस्थापन, पीड़ा, हिंसा और अपनों को खोने वाले असंख्य लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करेगा। सियालदह स्टेशन को इस स्मारक के लिए चुना जाना ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि विभाजन के बाद यह पश्चिम बंगाल आने वाले शरणार्थियों के प्रमुख प्रवेश द्वारों में शामिल था।

समारोह में पश्चिम बंगाल की शहरी विकास एवं नगर पालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल, सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों की राज्य मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती, लोक उद्यम एवं औद्योगिक पुनर्निर्माण मंत्री तपस रॉय, पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडेय, सियालदह मंडल के मंडल रेल प्रबंधक राजीव सक्सेना तथा संस्कृति मंत्रालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

फोटो प्रदर्शनी में दिखी विभाजन की पीड़ा

कार्यक्रम के दौरान विभाजन पीड़ितों की स्मृति में विशेष फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें विभाजन के दौरान हुए बड़े पैमाने पर पलायन, विस्थापित परिवारों की कठिनाइयों और नए सिरे से जीवन बसाने के संघर्ष को दर्शाने वाले ऐतिहासिक छायाचित्र प्रदर्शित किए गए। विभाजन की त्रासदी के प्रत्यक्षदर्शी हिमांशु गांगुली की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और भावुक बना दिया।

पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडेय ने कहा कि सियालदह विभाजन के इतिहास और उससे जुड़ी मानवीय पीड़ा का जीवंत साक्षी है। प्रस्तावित स्मारक विस्थापन और कठिनाइयों का सामना करने वाले लोगों को विनम्र श्रद्धांजलि देने के साथ उनके साहस और जीवन को दोबारा खड़ा करने के संकल्प की याद दिलाता रहेगा।

सियालदह मंडल के मंडल रेल प्रबंधक राजीव सक्सेना ने कहा कि मंडल इस ऐतिहासिक स्मारक की मेजबानी को गौरव की बात मानता है। उन्होंने कहा कि यह स्मारक उन लाखों लोगों की स्थायी स्मृति के रूप में खड़ा होगा, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में सियालदह स्टेशन से होकर नए जीवन की शुरुआत की।

वर्ष 1947 के बाद हजारों विस्थापित परिवार अपने घर, संपत्ति और परिचित परिवेश को पीछे छोड़कर सुरक्षा और नए जीवन की तलाश में सियालदह पहुंचे थे। ऐसे में यह स्टेशन उनके लिए केवल यात्रा का स्थान नहीं, बल्कि अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ते नए जीवन का पहला पड़ाव भी बना था।

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवराम माझी ने कहा कि स्मारक और फोटो प्रदर्शनी जैसे प्रयासों के माध्यम से सियालदह स्टेशन से जुड़े इस महत्वपूर्ण इतिहास और मानवीय साहस की कहानी को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

सियालदह स्टेशन पर स्थापित होने वाला यह स्मारक स्मृति, संघर्ष, संकल्प और आशा का प्रतीक बनेगा और विभाजन की पीड़ा झेलने वाले लोगों की यादों को लंबे समय तक जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।