कबाड़ भी बना कमाई का जरिया, मध्य रेल ने रचा नया कीर्तिमान सबसे तेज 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार, 5 अगस्त तक कबाड़ बिक्री से 202.55 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड आय

कबाड़ भी बना कमाई का जरिया, मध्य रेल ने रचा नया कीर्तिमान

सबसे तेज 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार, 5 अगस्त तक कबाड़ बिक्री से 202.55 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड आय

मुंबई। मध्य रेल ने वित्तीय अनुशासन, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और शून्य कबाड़ स्थिति की दिशा में शानदार उपलब्धि हासिल करते हुए कबाड़ बिक्री से 202.55 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। 5 अगस्त 2026 तक हासिल यह उपलब्धि मध्य रेल के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है।

मध्य रेल ने कबाड़ बिक्री में सबसे कम समय में 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि की तुलना में इस वर्ष कबाड़ बिक्री के राजस्व में 76.94 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह अब तक की सर्वाधिक कबाड़ बिक्री है।

कबाड़ के व्यवस्थित निपटान से बढ़ी आय

मध्य रेल ने अनुपयोगी एवं अतिरिक्त सामग्री को व्यवस्थित तरीके से चिन्हित कर उसका समयबद्ध निपटान किया। इसके तहत 17,755 मीट्रिक टन रेल स्थायी मार्ग कबाड़, 1,21,381 स्लीपर, 11,658 मीट्रिक टन लौह कबाड़ और 1,370 मीट्रिक टन अलौह कबाड़ का निपटान किया गया।

इसके अलावा 11 लोकोमोटिव, 33 कोच और 33 वैगन सहित रोलिंग स्टॉक का भी निपटान किया गया।

सभी मंडलों का शानदार योगदान

इस उपलब्धि में मध्य रेल के सभी मंडलों, उत्पादन इकाइयों और कार्यशालाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मंडलवार बिक्री में मुंबई मंडल ने 36.78 करोड़ रुपये, भुसावल मंडल ने 33.19 करोड़ रुपये, पुणे मंडल ने 27.22 करोड़ रुपये, नागपुर मंडल ने 26.12 करोड़ रुपये और सोलापुर मंडल ने 10.85 करोड़ रुपये का योगदान दिया। वहीं अन्य उत्पादन इकाइयों एवं कार्यशालाओं से 68.39 करोड़ रुपये की बिक्री हुई।

इस तरह कुल 202.55 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हुआ।

शून्य कबाड़ की ओर तेजी से बढ़ रहा मध्य रेल

मध्य रेल द्वारा सभी मंडलों और डिपो में कबाड़ की पहचान, पृथक्करण और निपटान के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य अनुपयोगी सामग्री को लंबे समय तक जमा रखने के बजाय उसे उपयोगी राजस्व में परिवर्तित करना है।

मध्य रेल की यह उपलब्धि बेहतर संसाधन प्रबंधन, वित्तीय अनुशासन, परिचालन दक्षता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। रेलवे द्वारा कबाड़ को राजस्व का स्रोत बनाकर ?शून्य कबाड़ मिशन? की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

डॉ. स्वप्निल निला, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, मध्य रेल ने इस उपलब्धि को मध्य रेल के विभिन्न मंडलों, इकाइयों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया।