23 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होगी सवर्ण आक्रोश महापंचायत : राज शेखावत

यूजीसी कानून के विरोध में डूंगरपुर पहुंचे क्षत्रिय करणी सेना और अखंड पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष; कहा? गुजरात से दिल्ली तक निकाली जा रही है जनजागरण जागरूकता वाहन यात्रा

संवाददाता ? संतोष व्यास

डूंगरपुर। केंद्र सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के संदर्भ में लागू किए गए यूजीसी के नए नियमों के विरोध में सामान्य वर्ग का आक्रोश गहराता जा रहा है। इसी क्रम में 23 अगस्त को दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर सवर्ण आक्रोश महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी क्षत्रिय करणी सेना और अखंड पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत ने जनजागरण जागरूकता वाहन यात्रा के तहत डूंगरपुर आगमन के दौरान शुक्रवार को आयोजित एक पत्रकार वार्ता में दी।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए शेखावत ने केंद्र सरकार के इस कानून को सामान्य वर्ग के युवाओं के भविष्य पर कुठाराघात बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य राजपूत, ब्राह्मण और वैश्य समाज के मेधावी छात्रों के अवसरों और भविष्य को प्रभावित करना है।

- सुप्रीम कोर्ट में जारी है कानूनी लड़ाई

राज शेखावत ने कहा कि इस यूजीसी कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है। पिछले छह महीनों से सरकार से इसे वापस लेने की मांग की जा रही है, लेकिन कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। इसी के विरोध में गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से होती हुई यह विशाल वाहन यात्रा दिल्ली पहुंचेगी, जहां न्यायालय की अनुमति के साथ 23 अगस्त से देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत होगी।

- राजनीतिक दलों पर अनदेखी का आरोप

राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि चाहे कांग्रेस हो, भाजपा या कोई अन्य दल किसी ने भी आज तक सामान्य वर्ग के कल्याण के लिए कोई विशेष योजना या आयोग का गठन नहीं किया है। इसके विपरीत, सामान्य वर्ग के संवैधानिक और सामाजिक अधिकारों को लगातार सीमित किया जा रहा है।

- घर-घर जाकर दिलाएंगे कुलदेवी की शपथ

आगामी चुनावों का जिक्र करते हुए क्षत्रिय करणी सेना के अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यूजीसी कानून की वापसी तक यह आंदोलन थमेगा नहीं। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले चुनावों में कार्यकर्ता राजपूत, ब्राह्मण और वैश्य समाज के घर-घर जाकर कुलदेवी की शपथ दिलाएंगे और सामान्य वर्ग के हितों की अनदेखी करने वाले राजनीतिक दलों का पूर्ण रूप से सामाजिक व राजनीतिक बहिष्कार किया जाएगा।