वाडा पुनाली में 5 वर्षों से अधूरे पड़े सामुदायिक शौचालय और मनरेगा मजदूरी के बकाया भुगतान को लेकर ग्रामीणों ने जताया आक्रोश

दोवडा विकास अधिकारी को ज्ञापन सौपकर समस्या के त्वरित समाधान की रखी मांग

वागड़दूत संवाददाता ? संतोष व्यास

डूंगरपुर। स्वच्छ भारत मिशन के क्रियान्वयन में बरती जा रही प्रशासनिक शिथिलता को लेकर प्रकाशित खबर का बड़ा असर देखने को मिला है। शुक्रवार को ग्राम पंचायत पुनाली के वाडा पुनाली गाँव के ग्रामीणों ने लामबंद होकर ग्राम पंचायत पहुंचकर दोवड़ा विकास अधिकारी बाबूलाल यादव तथा ग्राम विकास अधिकारी वैभव त्रिवेदी को ज्ञापन सौंपकर अपनी माँगें रखीं।

ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत पुनाली के वार्ड संख्या 1 व 2 के मस्टर रोल संख्या 9459 एवं 13272 का मनरेगा मजदूरी भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। ग्रामीणों ने अतिशीघ्र बकाया भुगतान खाते में हस्तांतरित करने तथा पिछले कई वर्षों से लटके पड़े अधूरे सामुदायिक शौचालय का निर्माण पूर्ण करवाने की पुरजोर माँग की है।

मामले को लेकर ग्राम विकास अधिकारी वैभव त्रिवेदी ने बताया कि वाडा पुनाली में सामुदायिक शौचालय का कार्य वर्ष 2021-22 में स्वीकृत हुआ था। उस समय तत्कालीन ठेकेदार/वेंडर द्वारा कार्य में ढिलाई बरतते हुए इसे अधूरा छोड़ दिया गया था। वर्तमान में हमने निर्माण कार्य पुनः शुरू करवा दिया है। भवन पर छत ढाली जा चुकी है; अब प्लास्टर, नल फिटिंग और सेनेटरी का काम बाकी है। कार्य प्रगति पर है और इसे शीघ्र ही पूर्ण कर जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। जहाँ तक बजट का सवाल है, पूर्व स्वीकृत राशि के अतिरिक्त इस कार्य के पेटे अभी कोई नया भुगतान जारी नहीं किया गया है, पूरा काम संपन्न होने के बाद ही अंतिम भुगतान किया जाएगा। वहीं, मनरेगा मजदूरी भुगतान के संबंध में उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों से बात की जा चुकी है। प्रणाली स्तर से इसीएस की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अगले एक से दो दिनों के भीतर सभी पात्र श्रमिकों के बैंक खातों में बकाया भुगतान की राशि जमा हो जाएगी।

ग्रामीणों का कहना है कि समाचार पत्र में मुद्दा उजागर होने के बाद प्रशासन में हलचल जरूर हुई है, लेकिन जब तक शौचालय चालू नहीं हो जाता और मनरेगा की मजदूरी खातों में नहीं आ जाती, वे शांत नहीं बैठेंगे। यदि निर्धारित समय सीमा में माँगें पूरी नहीं हुईं, तो उग्र आंदोलन की राह अपनाई जाएगी। इस अवसर पर लीला, दमा, जसोदा, सुरता, जेना, माया, भूरी, कांति, राजू, लली, गीता सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष मौजूद थे।