सामाख्याली–भचाऊ नई तीसरी-चौथी रेल लाइन का सीआरएस निरीक्षण पूरा, 130 किमी/घंटा की रफ्तार से सफल स्पीड ट्रायल

गांधीधाम। पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल में सामाख्याली गांधीधाम चौहरीकरण (क्वाड्रपलिंग) परियोजना के तहत सामाख्याली?भचाऊ रेलखंड पर नव-निर्मित तीसरी एवं चौथी रेल लाइन का रेल संरक्षा आयुक्त (पश्चिम सर्कल) ई. श्रीनिवास ने विस्तृत संरक्षा निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मंडल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश तथा मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) प्रदीप गुप्ता सहित रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

निरीक्षण के दौरान नव-निर्मित तीसरी एवं चौथी रेल लाइन पर पहली बार 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव और ऑब्जर्वेशन कार के साथ सफल स्पीड ट्रायल किया गया। यह परीक्षण सुरक्षित और तेज रेल संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। अंतिम संरक्षा स्वीकृति मिलने के बाद इस रेलखंड पर यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू किया जाएगा।

संरक्षा निरीक्षण के तहत सामाख्याली से भचाऊ और वापस मोटर ट्रॉली से रेल लाइन, ट्रैक, सिग्नलिंग, दूरसंचार प्रणाली, ओवरहेड विद्युत उपकरण (ओएचई), समपार फाटक, पुलों और अन्य संरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की गई। सामाख्याली और वोंध रेलवे स्टेशनों के यार्ड, इंटरलॉकिंग, पॉइंट मशीन, सिग्नलिंग व्यवस्था और यात्री सुविधाओं का भी विस्तृत निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

निरीक्षण के दौरान वोंध रेलवे स्टेशन पर गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स, गांधीधाम के प्रतिनिधिमंडल ने रेल संरक्षा आयुक्त और मंडल रेल प्रबंधक का स्वागत किया तथा रेलवे अवसंरचना विकास, अमृत भारत स्टेशन योजना और चौहरीकरण परियोजना की सराहना की। प्रतिनिधियों ने कहा कि इससे कच्छ क्षेत्र में रेल संपर्क मजबूत होगा और उद्योग, व्यापार तथा पर्यटन को नई गति मिलेगी।

मंडल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश ने निरीक्षण के दौरान एक समपार फाटक पर स्थानीय नागरिकों से संवाद भी किया। फाटक बंद रहने के दौरान होने वाली परेशानी की जानकारी मिलने पर उन्होंने अधिकारियों को जनहित में त्वरित और व्यवहारिक समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

रेलवे के अनुसार सामाख्याली भचाऊ चौहरीकरण परियोजना पूरी होने से कांडला और मुंद्रा बंदरगाहों से होने वाले माल परिवहन को बड़ी मजबूती मिलेगी। चार रेल लाइनों के संचालन से इस व्यस्त रेलखंड की क्षमता बढ़ेगी, यात्री एवं मालगाड़ियों का संचालन अधिक सुचारु होगा, लॉजिस्टिक लागत कम होगी और कच्छ क्षेत्र में उद्योग, व्यापार, निवेश तथा रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।