जून 2025 जून 2026 तक इथेनॉल प्लांट्स को दबाकर सस्ते में चावल बेचा। जिस चावल को 3,720 / 3,889 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीदकर 2,250 / 2,320 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से इथेनॉल बनाने के लिए बेचा। यानी 40% घाटे में

*प्रधानमंत्री हो तो मोदी जैसा हो, वर्ना ना हो।*

एकदम ताजा खबर है। मोदी सरकार ने ही राज्यसभा में बताया है। सरकारी निगम है FCI पूरा नाम भारतीय खाद्य निगम। इसने पिछले साल जून से इस जून के 1 साल में इथेनॉल प्लांट्स को दबाकर सस्ते में चावल बेचा। जिस चावल को खरीदा गया 3,720 / 3,889 रुपये प्रति क्विंटल के भाव, वह चावल इथेनॉल बनाने के लिए दे दिया गया 2,250 / 2,320 रुपये प्रति क्विंटल के भाव यानी 40 फीसदी का मस्त डिस्काउंट इस तरह कुल 52 लाख टन चावल बेचे गये।

इससे जुड़ी एक और खबर है। यह खबर है 20 जुलाई की। उपभोक्ता, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने 2026-27 के लिए 72 लाख टन चावल इथेनॉल प्लांट्स के लिए रिजर्व कर दिया। यह भी चावल जायेगा FCI के पास से ही। इसके लिए रेट फिक्स किया गया है 2,390 रुपये प्रति क्विंटल। यहाँ ज्यादा नहीं, बस एक डेटा देता हूँ तुलना करने के लिए। मोदी सरकार ने और भी श्रेणियों के लिए रेट फिक्स किये हैं। एक श्रेणी है जिसमें 10% टूटे चावल होते हैं। ऐसा 20 लाख टन चावल खुले बाजार में बिकेगा ई-ऑक्शन से। इसका रिजर्व प्राइस है 3,090 / 3,180 रुपये। मतलब खेल देख रहे हैं? टूटे चावल से 20-25% सस्ते में साबूत चावल मिल रहे हैं इथेनॉल प्लांट्स को।

भारत चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। इस साल पूरा विश्व एल-नीनो झेल रहा है। सब जगह चावल का उत्पादन कम रहने वाला है। इस कारण चावल के भाव ग्लोबल मार्केट में बढ़े हुए हैं। अभी का भाव प्रीमियम/बासमती में 1,050 डॉलर के आस-पास चल रहा है। नॉन-बासमती में 5% टूटे दाने वाले चावल का रेट 355 / 380 डॉलर प्रति टन चल रहा है। रुपये में यह भाव आ जाता है 3,400 / 3,650 रुपये प्रति क्विंटल का।

अब सोचिये कि जिस चावल को निर्यात करके डॉलर (विदेशी मुद्रा) कमाया जा सकता है, उसे मोदी की सरकार 40% के डिस्काउंट पर इथेनॉल वाले प्लांट्स को दे रही है। उसके बाद भी इथेनॉल का भाव पेट्रोल से महँगा बैठ रहा है। मोदी की सरकार ने ही इथेनॉल खरीदने का सरकारी भाव तय किया है।गणित आज रहने देते हैं। आप लोग खुद ही पढ़कर अंदाजा लगायें कि इथेनॉल के नाम पर कितने बड़े स्तर पर घोटाला चल रहा है और किस तरह जनता के पैसों की लूट मची हुई है! साथ में यह भी सोचिये कि यदि इथेनॉल प्लांट को 40% डिस्काउंट पर सरकारी चावल मिल जा रहा है, वो प्लांट क्यों ओपन मार्केट से महँगा चावल खरीदेगा? और जब ओपन मार्केट से इथेनॉल प्लांट ने चावल खरीदा ही नहीं, फिर किसानों को फायदा कैसे हो सकता है?

एथेनॉल कंपनियों पर सरकार मेहरबान? FCI ने 40% सस्ते में बेचा चावल, संसद में खुला राज
https://www.livehindustan.com/national/fci-sold-rice-to-ethanol-plants-below-acquisition-cost-govt-in-rajya-sabha-amid-e20-raw-201785296294970.html
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