दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण में उत्तर मध्य रेलवे की बड़ी पहल, 400 को रोजगार और 100 युवाओं को मिल रही कौशल प्रशिक्षण

दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण में उत्तर मध्य रेलवे की बड़ी पहल, 400 को रोजगार और 100 युवाओं को मिल रही कौशल प्रशिक्षण

'सुगम्य भारत' के विजन को साकार करने की दिशा में उत्तर मध्य रेलवे का सराहनीय कदम, समान अवसर और आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर

प्रयागराज। उत्तर मध्य रेलवे ने दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और समावेशी रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय पहल करते हुए करीब 400 दिव्यांगजनों को विभिन्न संविदा आधारित कार्यों में रोजगार उपलब्ध कराया है। इसके साथ ही 100 दिव्यांग युवाओं को एक्ट अप्रेंटिसशिप योजना के तहत कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।

उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक एन. पी. सिंह के मार्गदर्शन में यह अभियान वर्ष की शुरुआत से ही संचालित किया जा रहा है। उन्होंने तीनों मंडलों को निर्देश दिए थे कि जहां भी संभव हो, दिव्यांगजनों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इसी के परिणामस्वरूप रेलवे ने विभिन्न संविदा व्यवस्थाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में दिव्यांगजनों को रोजगार से जोड़ा है।

रेलवे के अनुसार, दिव्यांग कर्मचारी ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन (एटीवीएम) ऑपरेटर, स्टेशन उद्घोषक, डेटा एंट्री ऑपरेटर, 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' (ओएसओपी) स्टॉल संचालक, ग्राहक सेवा सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। यह पहल दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 की भावना के अनुरूप समान अवसर, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को बढ़ावा देती है।

उत्तर मध्य रेलवे ने केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक ही अपने प्रयास सीमित नहीं रखे हैं, बल्कि दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता को ध्यान में रखते हुए 100 दिव्यांग युवाओं को एक्ट अप्रेंटिसशिप योजना के तहत तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे उनकी रोजगार क्षमता और भविष्य की संभावनाएं मजबूत होंगी।

यह पहल उत्तर मध्य रेलवे के प्रयागराज, झांसी और आगरा मंडलों के साथ-साथ विभिन्न कार्यशालाओं और उत्पादन इकाइयों में भी लागू की गई है। वर्तमान में प्रयागराज मंडल में लगभग 200, झांसी मंडल में 100 और आगरा मंडल में 63 दिव्यांगजन संविदा के आधार पर कार्यरत हैं।

इसके अलावा, उत्तर मध्य रेलवे के नियमित कैडर में भी 784 दिव्यांग कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें वर्ष 2025-26 के दौरान नियुक्त 15 कर्मचारी भी शामिल हैं। रेलवे का कहना है कि वह दिव्यांगजनों के लिए रोजगार, कौशल विकास और समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भविष्य में भी ऐसे प्रयास जारी रखेगा।

यह पहल उत्तर मध्य रेलवे की समावेशी कार्यसंस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का एक सशक्त उदाहरण मानी जा रही है।