एटा/अवागढ: गर्मी से कक्षाओं में छात्र छात्राएं बेहाल, जनरेटर और पंखे रामभरोसे, जनता इंटर कॉलेज अवागढ की व्यवस्थाओं पर उठे ग़ंभीर सवाल।

*एटा/अवागढ: गर्मी से बेहाल छात्र, जनरेटर और पंखे राम भरोसे; जनता इंटर कॉलेज अवागढ की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल।*

बिजली जाते ही ठप हो जाते हैं पंखे, गंदे शौचालय और उमस से जूझ रहे छात्र; प्रबंधक बोले- प्रधानाचार्य से बात करूंगा।


आवागढ़ (एटा):

अवागढ नगर के प्रतिष्ठित जनता इंटर कॉलेज, अवागढ़ में भीषण गर्मी और उमस के बीच छात्र-छात्राएं बदहाल हैं। करीब डेढ़ हजार विद्यार्थियों वाले इस राजकीय सहायता प्राप्त विद्यालय में बिजली कटते ही अधिकांश कक्षाओं में पंखे बंद हो जाते हैं। छात्रों का आरोप है कि विद्यालय का जनरेटर नियमित रूप से नहीं चलाया जाता, जिससे कक्षाओं में बैठना मुश्किल हो जाता है।

विद्यालय में करीब 22 शिक्षक एवं लिपिक कर्मचारी तथा नौ चपरासी होने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं दिख रही है। कई कक्षाओं में 50 से 100 तक छात्र बैठते हैं, जबकि तीन से पांच पंखों में भी कुछ खराब पड़े हैं और कुछ बेहद धीमी गति से चलते हैं। इससे कक्षाओं में उमस बढ़ जाती है और छात्र बीच-बीच में बाहर निकलने को मजबूर हो जाते हैं।

विद्यालय के शौचालयों की सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। छात्रों का कहना है कि सफाई कर्मचारी होने के बावजूद शौचालय अक्सर गंदे रहते हैं। हालांकि अधिकांश छात्र खुलकर बोलने से बचते हैं। उनका कहना है कि उन्हें आशंका रहती है कि शिकायत करने पर पढ़ाई या परीक्षा में परेशानी हो सकती है।

विद्यालय में प्रवेश के समय विद्यार्थियों से विभिन्न मदों में शुल्क लिया जाता है, जिनमें पंखा शुल्क, पुस्तकालय शुल्क, विज्ञान शुल्क, रेडक्रॉस शुल्क, विकास शुल्क सहित कई अन्य शुल्क शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब विद्यार्थियों से विभिन्न सुविधाओं के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है तो उन्हें पर्याप्त सुविधाएं क्यों नहीं मिल रही हैं।
बातचीत में कुछ बच्चों ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जनरेटर जब चलता है जब कोई बड़ा अधिकारी कॉलेज में निरीक्षण को आता है जैसे ही अधिकारी कॉलेज से बाहर होता है वैसे ही जनरेटर और पंखे बंद हो जाते हैं।
इसके अलावा कॉलेज में सोलर सिस्टम 10 किलो वाट का है जो भी बंद अवस्था में पड़ा हुआ है रखरखाव के अभाव में लाखों रुपए गवर्नमेंट जिसके लिए खर्च कर रही है उसके बावजूद भी ऐसी उदासीन रवैया छात्रों पर पढ़ रहा भारी जिसकी वजह से ज्यादातर लोग सरकारी विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ने से कतराते हैं लेकिन जिसके पास समुचित फीस भरने को पैसे नहीं है ऐसे ही लोगों के बच्चे इन विद्यालयों में पढ़ते हैं जिनको सिस्टम की उदासीनता का खामियाजा भुगतना पड़ता है

मौके पर वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान कई कक्षाओं में न तो पंखे चलते मिले और न ही जनरेटर संचालित मिला। इस संबंध में विद्यालय की एक महिला लिपिक से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि जनरेटर चलता है, लेकिन उस समय डीजल समाप्त होने की बात कही। यदि डीजल समाप्त था तो समय रहते उसकी व्यवस्था न होना भी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

विद्यालय के प्रबंधक विपिन कुमार जैन (राजा) से इस संबंध में बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस स्थिति की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि वह विद्यालय के प्रधानाचार्य से बात कर मामले की जानकारी लेकर आवश्यक कदम उठाएंगे।

अब देखना यह होगा कि जिला विद्यालय निरीक्षक और शिक्षा विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर विद्यालय में विद्यार्थियों को गर्मी से राहत दिलाने तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए क्या कार्रवाई करते हैं।


रिपोर्ट: रमेश जादौन एटा।