भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसानों का प्रदर्शन, कई किसान नेताओं को किया गया नजरबंद।

पीलीभीत। भारत-अमेरिका प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के विरोध में गुरुवार को किसान, मजदूर, युवा, महिला, छात्र एवं सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। संगठनों ने इस प्रस्तावित समझौते को किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की।
संयुक्त किसान, मजदूर, युवा, महिला, छात्र एवं सामाजिक संगठनों की ओर से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में कहा गया कि भारत के अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं, जबकि अमेरिका में कृषि बड़े स्तर पर व्यावसायिक रूप से की जाती है तथा वहां किसानों को भारी सरकारी सहायता और सब्सिडी मिलती है। ऐसे में दोनों देशों के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड डील भारतीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
संगठनों के अनुसार 4 जून को जिला मुख्यालय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराने का कार्यक्रम निर्धारित था। भाकियू (चढ़ूनी) किसान नेताओं का आरोप है कि प्रशासन ने कार्यक्रम को विफल करने के उद्देश्य से किसान संगठन के जिला अध्यक्ष, जिला उपाध्यक्ष तथा कई प्रमुख कार्यकर्ताओं को उनके घरों पर नजरबंद कर दिया।
किसान नेताओं ने दावा किया कि जिला अध्यक्ष रंजीत सिंह कहलो को भी घर पर नजरबंद रखा गया, जिससे जिला मुख्यालय पर प्रस्तावित विरोध कार्यक्रम प्रभावित हुआ। हालांकि संगठनों का कहना है कि इसके बावजूद कई स्थानों और प्रमुख चौराहों पर कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए पुतला दहन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की कि भारत-अमेरिका प्रस्तावित फ्री ट्रेड डील को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि कृषि, खाद्य सुरक्षा और करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़े मुद्दों पर कोई भी निर्णय व्यापक जनसहमति और संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाना चाहिए।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।