गोगहरा में मनरेगा कार्यों पर उठे सवाल, फर्जी मस्टरोल भरने के आरोप से मचा हड़कंप गोगहरा के प्रधान पर बीडीओ, एपीओ मनरेगा रंजीत कुमार सिंह, सचिव और जेई का संरक्षण प्राप्त

गोगहरा में मनरेगा कार्यों पर उठे सवाल, फर्जी मस्टरोल भरने के आरोप से मचा हड़कंप

गोगहरा के प्रधान पर बीडीओ, एपीओ मनरेगा रंजीत कुमार सिंह, सचिव और जेई का संरक्षण प्राप्त

मनरेगा योजना में अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

चकिया। चकिया विकास खंड अंतर्गत गोगहरा ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में संचालित मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती जा रही हैं। आरोप है कि मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति और मस्टरोल में दर्ज आंकड़ों के बीच भारी अंतर है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।

84 मजदूर दर्ज, लेकिन कार्यस्थल पर नहीं दिखी उतनी संख्या

स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित कार्यों के मस्टरोल में 84 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जबकि कार्यस्थल पर इतनी संख्या में श्रमिक दिखाई नहीं देते। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार निरीक्षण के दौरान भी मौके पर गिने-चुने मजदूर ही कार्य करते नजर आए।

फर्जी सॉफ्टवेयर से मस्टरोल भरने के आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मनरेगा पोर्टल पर श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने में अनियमितताएं की जा रही हैं। कुछ लोगों का दावा है कि बिना वास्तविक उपस्थिति के मस्टरोल भरे जा रहे हैं तथा अपलोड किए गए फोटो और कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति में अंतर दिखाई देता है।

एक ही फोटो के बार-बार इस्तेमाल की चर्चा

गांव में यह भी चर्चा है कि कुछ मामलों में एक ही फोटो या समान फोटो का उपयोग अलग-अलग उपस्थिति विवरण में किया गया है। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि गोगहरा के प्रधान पर बीडीओ, एपीओ मनरेगा रंजीत कुमार सिंह, सचिव और जेई का संरक्षण प्राप्त है तथा शिकायतों के बावजूद मामले की प्रभावी जांच नहीं हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, मुख्य विकास अधिकारी तथा मनरेगा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मनरेगा योजना ग्रामीण गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराने और विकास कार्यों को गति देने के लिए बनाई गई है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई

गोगहरा ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविकता प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवालों ने योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि मामले की पारदर्शी जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।