मनरेगा चकिया ब्लॉक के जिला पंचायत निधि का जेई रणविजय सिंह एक नंबर का कमीशनखोर, हर कार्य का कमीशन रहता है फिक्स जिला पंचायत निधि के तहत पचफेडियाँ में मनरेगा कार्यों पर उठे सवाल, फर्जी मस्टरोल

मनरेगा चकिया ब्लॉक के जिला पंचायत निधि का जेई रणविजय सिंह एक नंबर काकमीशनखोर, हर कार्य का कमीशन रहताहै फिक्स

जिला पंचायत निधि के तहत पचफेडियाँ में मनरेगा कार्यों पर उठे सवाल, फर्जी मस्टरोल और अनियमितताओं के आरोप

पंचायत के अंतिम वर्ष में मनरेगा कार्यों की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न

चकिया। चकिया विकास खंड अंतर्गत पचफेडियाँ ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों को लेकर ग्रामीणों द्वारा गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि जिला पंचायत निधि से संचालित कार्यों में मस्टरोल और श्रमिक उपस्थिति को लेकर कई तरह की विसंगतियां सामने आ रही हैं, जिससे योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

87 मजदूर दर्ज, लेकिन कार्यस्थल पर नहीं दिखे श्रमिक

ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित कार्यों के मस्टरोल में 87 श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जबकि कार्यस्थल पर अपेक्षित संख्या में मजदूर दिखाई नहीं देते। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार निरीक्षण के दौरान भी मौके पर बहुत कम श्रमिक कार्य करते पाए गए।

फर्जी मस्टरोल और फोटो अपलोड करने के आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा पोर्टल पर अपलोड की जा रही तस्वीरों और वास्तविक कार्यस्थल की स्थिति में अंतर दिखाई देता है। कुछ लोगों का दावा है कि श्रमिकों की उपस्थिति और कार्य की प्रगति को लेकर दर्ज आंकड़ों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

महिलाओं के नाम पर उपस्थिति दर्ज होने की शिकायत

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में महिलाओं के नाम पर मस्टरोल में उपस्थिति दर्ज है, जबकि कार्यस्थल पर अन्य लोग कार्य करते दिखाई देते हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ग्रामीणों ने जांच की उठाई मांग

ग्रामवासियों का कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना और विकास कार्य कराना है। यदि कहीं अनियमितता हो रही है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।

अधिकारियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद मामले का संतोषजनक निस्तारण नहीं हो पा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति

पचफेडियाँ ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों को लेकर लगाए गए आरोपों की सत्यता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवालों ने योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।