मैनपुरी पति सीमा पर पत्नी हड़ताल पर 30 घंटे से जारी हैं प्रदर्शन दबंगों पर कब्जे का आरोप।

मैनपुरी पति सीमा पर पत्नी हड़ताल पर 30 घंटे से जारी हैं प्रदर्शन दबंगों पर कब्जे का आरोप।

मैनपुरी -मैनपुरी में जमीन और कोल्ड स्टोरेज के पास की जमीन को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। एक तरफ कपिलमुनि एग्रो फूड्सने खुद को वैध मालिक बताते हुए दूसरे पक्ष पर अवैध दबाव और कब्जे के प्रयास का आरोप लगाया है, तो वहीं दूसरे पक्ष ने फर्जी पट्टा, अवैध कब्जा और प्रशासनिक मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला अब प्रशासन और न्यायालय तक पहुंच चुका है।

थाना दन्नाहार के सिरसागंज रोड का मामला।

वीओ- 1 बीएसएफ में तैनात सुरेश चंद्र की पत्नी मधु परिवार समेत कलक्ट्रेट परिसर में जमीन पर हो रहे कब्जे के विरोध में धरने पर बैठ गई।उसकी ओर से जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि गाटा संख्या 257, ग्राम ललूपुर सहिनी की जमीन वर्ष 2009 में खरीदी गई थी और उसी जमीन पर कब्जे का विवाद खड़ा हुआ। प्रार्थना पत्र के मुताबिक, कपिलमुनि कोल्ड स्टोरेज संचालक द्वारा गाटा संख्या 984 की जमीन का बैनामा कराया गया, जिसकी सीमा गाटा संख्या 257 से सटी हुई बताई गई। आरोप है कि निर्माण के दौरान उनकी जमीन में भी मेड़बंदी और कब्जा कर लिया गया।उसका कहना है कि कई बार पुलिस और प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप लगाया गया कि स्थानीय पुलिस ने मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की और निर्माण कार्य चलता रहा। प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि उपजिलाधिकारी न्यायालय और सिविल कोर्ट में कई मुकदमे विचाराधीन हैं उसका दावा है कि न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने के आदेश भी दिए थे।सुरेश चंद्र पक्ष ने आरोप लगाया कि 9 मई 2026 को फिर से उनकी जमीन पर मिट्टी डालकर कब्जा करने का प्रयास किया गया। शिकायत में कहा गया कि रात के समय जेसीबी और मशीनों से कार्य कराया गया, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन निर्माण कार्य नहीं रुका। इसके अलावा दूसरे पक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि गाटा संख्या 984 से जुड़ा पट्टा फर्जी तरीके से कराया गया था और इसकी जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

वीओ - 2:तो वहीं दूसरी ओर कपिलमुनि एग्रो फूड्स की ओर से जिलाधिकारी मैनपुरी को दिए गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि ओढेन्य मंडल के गाटा संख्या 984/2 की जमीन पर वर्ष 2018 में विधिवत बैनामा कराया गया था। उनका कहना है कि इससे पहले भी वर्ष 1991 से उक्त भूमि पर चारदीवारी और निर्माण मौजूद था।शिकायत पत्र के अनुसार, कंपनी ने वहां कोल्ड स्टोरेज और पुरानी बाउंड्रीवाल का पुनर्निर्माण कराया। कंपनी का दावा है कि गाटा संख्या 984/2 की सीमा लालपुर सथिनी के गाटा संख्या 257 से अलग है और दोनों का आपस में कोई विवाद नहीं है। दूसरे पक्ष का ये भी आरोप है कि वर्ष 2019 में बिना पर्याप्त दस्तावेजों के निर्माण कार्य रुकवाया गया था। इसके बाद मामला विभिन्न विभागों और न्यायालयों तक पहुंचा। उनका कहना है कि तहसीलदार की जांच में भी यह स्पष्ट हुआ कि बाउंड्रीवाल औंछा मंडल की सीमा में बनी हुई है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि दूसरे पक्ष के लोग कर्मचारियों को धमकाते हैं और रात में सामान चोरी होने जैसी घटनाएं भी हुईं। कंपनी के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध दबाव बनाकर निर्माण कार्य रुकवाने वालों पर कार्रवाई की जाए। कंपनी की ओर से यह भी कहा गया कि विवादित स्थल के सामने सड़क किनारे मिट्टी डालकर कृत्रिम विवाद खड़ा करने की कोशिश की जा रही है, जबकि वह हिस्सा सार्वजनिक मार्ग का बताया गया है।फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेजों और दावों के आधार पर खुद को सही बता रहे हैं। मामला प्रशासनिक जांच और न्यायालय में विचाराधीन है। अब देखना होगा कि जांच और कोर्ट के फैसले में किस पक्ष के दावों को सही माना जाता है।