खनन माफियाओं पर कार्रवाई के आदेश बेअसर! शहाबगंज में खुलेआम चल रहा अवैध खनन, जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे सवाल,“चंद रुपयों के खातिर धूमिल हो रही थाना की छवि”

खनन माफियाओं पर कार्रवाई के आदेश बेअसर! शहाबगंज में खुलेआम चल रहा अवैध खनन, जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे सवाल,?चंद रुपयों के खातिर धूमिल हो रही थाना की छवि?

थाना प्रभारी की चुप्पी खनन माफिया बेलगाम

शहाबगंज/चंदौली। प्रदेश सरकार द्वारा अवैध खनन के खिलाफ लगातार सख्ती और ?जीरो टॉलरेंस? नीति के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जनपद चंदौली के शहाबगंज थाना क्षेत्र में हालात इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में रात के अंधेरे में धड़ल्ले से अवैध मिट्टी खनन जारी है और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। इससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी व्याप्त है।

ग्रामीणों का आरोप है कि शहाबगंज क्षेत्र में खनन माफिया बेखौफ होकर जेसीबी मशीनों से मिट्टी की खुदाई कर रहे हैं। देर रात से लेकर सुबह तक ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रालियां सड़कों पर फर्राटा भरती दिखाई देती हैं। इससे जहां सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा है, वहीं सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मुख्यमंत्री Yogi Adityanath द्वारा अवैध खनन के खिलाफ बुल्डोजर कार्रवाई और सख्त कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन शहाबगंज क्षेत्र में इन आदेशों का असर दिखाई नहीं दे रहा। लोगों का आरोप है कि पुलिस अधीक्षक स्तर से कार्रवाई के निर्देश मिलने के बावजूद थाना स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा।

रातभर गूंजती हैं जेसीबी और ट्रैक्टरों की आवाजें

ग्रामीणों के मुताबिक, रात होते ही गांवों और संपर्क मार्गों पर जेसीबी मशीनों की आवाज सुनाई देने लगती है। मिट्टी लदे ओवरलोड ट्रैक्टर तेज रफ्तार से गुजरते हैं, जिससे राहगीरों और ग्रामीणों में भय का माहौल बना रहता है। कई स्थानों पर सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।

एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ?रोज रात में मिट्टी लदे ट्रैक्टर निकलते हैं। शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती। ऐसा लगता है कि खनन माफियाओं को खुली छूट मिली हुई है।?

?चंद रुपयों के खातिर धूमिल हो रही थाना की छवि?

क्षेत्र में चर्चा है कि अवैध खनन के पीछे एक संगठित तंत्र सक्रिय है। आरोप है कि चंद रुपयों के खातिर थाना की छवि धूमिल हो रही है और अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं। सूत्रों की मानें तो खनन से जुड़े लोगों से नियमित रूप से वसूली की जाती है, जिसके कारण कार्रवाई नहीं हो पाती। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
एक कथित खनन कारोबारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर दावा किया, ?हर महीने सेटिंग होती है, तभी तो बिना रोक-टोक रातभर काम चलता है।?

प्रशासनिक कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

मामले की शिकायतें उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद जांच और कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई बड़ा कदम सामने नहीं आया है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो अवैध खनन का यह कारोबार और अधिक बढ़ जाएगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि अवैध खनन में संलिप्त लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मशीनों और वाहनों को सीज किया जाए। साथ ही थाना स्तर पर जवाबदेही तय करते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए।

अब देखना यह होगा कि सरकार की ?जीरो टॉलरेंस? नीति वास्तव में जमीन पर उतरती है या फिर शहाबगंज में अवैध खनन का यह खेल इसी तरह चलता रहेगा।