शहाबगंज में रात के अंधेरे में फल-फूल रहा अवैध खनन का खेल, ‘कारखास तंत्र’ और फिक्स रेट से संचालित हो रहा नेटवर्क, जानकारी होने के बाद भी थाना प्रभारी साधी चुप्पी

शहाबगंज में रात के अंधेरे में फल-फूल रहा अवैध खनन का खेल, ?कारखास तंत्र? और फिक्स रेट से संचालित हो रहा नेटवर्क, जानकारी होने के बाद भी थाना प्रभारी साधी चुप्पी


चंदौली। जनपद के शहाबगंज थाना क्षेत्र में इन दिनों अवैध खनन का खेल खुलेआम जारी है। आरोप है कि रात होते ही खनन माफिया बेखौफ होकर जेसीबी मशीनों और ओवरलोड ट्रैक्टरों के जरिए मिट्टी की खुदाई और ढुलाई में जुट जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरा अवैध कारोबार एक संगठित तंत्र के तहत संचालित हो रहा है, जिसमें ?कारखास तंत्र? की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।


ग्रामीणों के अनुसार, रात के समय गांवों और सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ते ओवरलोड ट्रैक्टर न केवल नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि आए दिन दुर्घटनाओं को भी न्योता दे रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं, जिससे खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।


सूत्रों का दावा है कि इस अवैध खनन के पीछे एक ?फिक्स रेट सिस्टम? काम कर रहा है, जिसके तहत हर महीने निर्धारित रकम संबंधित तंत्र तक पहुंचाई जाती है। नाम न छापने की शर्त पर एक कथित खनन कारोबारी ने बताया कि ?हर काम का रेट तय है, और पैसा कारखास के माध्यम से पहुंचाया जाता है। इसी वजह से कोई कार्रवाई नहीं होती।?


मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब इस पूरे प्रकरण की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से @chandaulipolice तक पहुंची। पुलिस विभाग की ओर से जांच कर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए, लेकिन स्थानीय स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर निर्देशों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।


क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होगा, बल्कि आम जनजीवन भी खतरे में पड़ सकता है। अवैध खनन से सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।


ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही रात में चल रहे खनन कार्यों पर तत्काल रोक लगाने और संबंधित थाना स्तर पर जवाबदेही तय करने की भी मांग उठ रही है।


अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच के आदेश के बाद प्रशासन कितनी गंभीरता दिखाता है और क्या वाकई इस अवैध खनन के नेटवर्क पर लगाम लगाई जा सकेगी, या फिर यह खेल यूं ही जारी रहेगा।