पंचायत चुनाव में दिव्यांगजनों को 4% आरक्षण: सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम

राजस्थान में पंचायत चुनावों के दौरान दिव्यांगजनों को 4 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय सामाजिक समावेशन और समान अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस निर्णय से न केवल दिव्यांगजनों को राजनीतिक भागीदारी का अवसर मिलेगा, बल्कि उनकी आवाज भी अब स्थानीय शासन में प्रभावी रूप से सुनी जा सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाने के साथ-साथ समाज के उस वर्ग को मुख्यधारा में लाने का प्रयास है, जो लंबे समय से उपेक्षित रहा है। पंचायत स्तर पर प्रतिनिधित्व मिलने से दिव्यांगजन अपनी समस्याओं और आवश्यकताओं को सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे।

इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए सूर्यदेव सिंह सोमवंशी, प्रतिभागी राष्ट्रीय युवा संसद एवं देश के प्रथम दिव्यांग युवा सांसद ने कहा कि यह निर्णय सभी दिव्यांग साथियों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने इसे दिव्यांग सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा दिव्यांगजनों के हितों को प्राथमिकता दी है।

उन्होंने आगे कहा कि ?दिव्यांगजनों का हित सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त तभी हो सकता है, जब उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी मिले। पंचायत चुनाव में 4 प्रतिशत आरक्षण इसी दिशा में एक मजबूत कदम है।?

सामाजिक कार्यकर्ताओं और नीति विशेषज्ञों ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि भविष्य में अन्य राज्यों में भी इस प्रकार की पहल की जाएगी, जिससे देशभर में दिव्यांगजनों को समान अवसर मिल सके।

यह निर्णय न केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देगा, बल्कि समाज में समानता, सम्मान और आत्मनिर्भरता की भावना को भी सुदृढ़ करेगा।