विभाग की अनदेखी से क्लीनीक पर चल रहा था ऑपरेशन,प्रसूता ने तोड़ा दम    

आलापुर (अम्बेडकरनगर) | आला अधिकारियों की अनदेखी और स्थानीय अधिकारियों की सह पर डेढ़ साल पहले सीज क्लीनिक पर कल प्रसव के बाद एक 35 वर्षीय महिला की मौत हो गई जिससे नवजात शिशु सहित तीन और नाबालिग बच्चे अनाथ हो गए। सवाल उठता है कि आखिर जिस क्लीनिक को डेढ़ साल पहले स्थानीय अधिकारियों द्वारा अवैध रूप से संचालित होने के कारण सीज कर दिया गया था और संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था वह क्लीनिक और संचालक पुनः उसी स्थान पर कैसे और किसकी सह पर क्लीनिक चला रहे थे। एक परिवार उजड़ गया और चार बच्चे अनाथ हो गए तो प्रशासन की नींद उड़ गई और आनन फानन में कल शाम लगभग 8:00 बजे रात्रि में पुनः क्लीनिक को सीएचसी प्रभारी जहांगीरगंज के आदेश पर सील कर दिया गया और संचालक मौके से फरार है। मालूम हो थानाक्षेत्र राजेसुल्तानपुर के अंतर्गत ग्राम केदरुपुर निवासी राजकला पत्नी संदीप दलित उम्र लगभग 35 वर्ष को कल प्रसव पीड़ा होने पर घर वाले जहांगीरगंज ले गए जहां अवैध रूप से संचालित दिव्यांशु क्लीनिक पर परिजन लेकर पहुंच गए जहां मृतका ने नार्मल डिलीवरी में एक बच्चे बेटे को जन्म दिया तो परिजन खुशियां मनाई लेकिन उनकी खुशियां कुछ ही देर में मातम में बदल गई और जच्चा की मौत हो गई। मौत हो जाने पर घबड़ाई संचालिका जच्चा को लेकर पीजीआई टांडा पहुंच गई जहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया और संचालिका ने यहां भी खेल कर दिया और कागज पर डिलिवरी घर पर लिखा कर शव को परिजनों को सौंप दिया। गरीब परिवार नवजात शिशु और मृतका को लेकर घर पहुंच गए तो घर पर कोहराम मच गया। नाबालिग लड़की शिल्पा 12 वर्ष सलोनी 9 वर्ष शिवांश 6 वर्ष और बूढ़ी सास पियरी देवी की चीख पुकार से सबकी आंखें नम हो गईं। सुबह ग्रामीणों एवं परिजनों ने लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए थाना राजेसुल्तानपुर को सूचित किया तो तत्काल थानाध्यक्ष अक्षय कुमार पटेल उपनिरीक्षक शिवम सिंह मृतका के घर पहुंच गए और हर संभव सहयोग करने का आश्वासन दिया। परिजनों की मांग पर थानाध्यक्ष ने शव को कब्जे में लेकर अन्यत्र परीक्षण हेतु जिला अस्पताल भेज दिया। इस दौरान भीम आर्मी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए और दोषी क्लीनिक संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही करने की मांग किया। कुछ लोगों ने गरीब परिवार और अनाथ बच्चों को समझौता कर आर्थिक मदद और सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता दिलाने का भरोसा दिया है। परन्तु यहां एक यक्ष प्रश्न उठता है कि कब तक प्रशासन की अनदेखी और सह पर अवैध क्लीनिक चलते रहेंगे और बहन बेटियां काल के गाल में समाती रहेंगी और बच्चे अनाथ होते रहेंगे इसके जिम्मेदार लोगों पर कब कानून अपना शिकंजा कसेगा।