अमृत सरोवर की सूनी लहरें: प्यासे पशु, बहते सपने

आलापुर (अम्बेडकर नगर) | जनपद अम्बेडकर नगर के विकास खंड जहाँगीरगंज में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए अमृत सरोवर आज अपनी बदहाली की मूक कहानी कह रहे हैं। जिन सरोवरों को गाँवों की जीवनरेखा और जल संरक्षण का आधार बनना था, वे अब उपेक्षा के कारण अपनी ही दशा पर आंसू बहाते प्रतीत होते हैं। इन सरोवरों का उद्देश्य था वर्षा जल को संजोना, जिससे खेतों की सिंचाई सुचारु हो, भूजल स्तर में सुधार आए और पशु-पक्षियों को भी पर्याप्त जल मिल सके। परंतु विकासखण्ड जहाँगीरगंज क्षेत्र में कई अमृत सरोवर या तो सूख चुके हैं या उनमें संचित पानी की देखरेख का अभाव साफ दिखाई देता है। कहीं पर जलस्तर देखने को नहीं मिला,गंदगी और अव्यवस्था ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।इसका सबसे अधिक असर मूक पशुओं पर पड़ रहा है। जहाँगीरगंज क्षेत्र के प्रत्येक गाँवों में पशु पानी की तलाश में भटकते नजर आते हैं। सरोवरों के सूखे किनारे उनकी प्यास बुझ पाना कठिन हो गया है। जो सरोवर कभी जीवन का आधार बनने वाले थे, वे आज पशुओं के लिए भी संकट का कारण बनते जा रहे हैं।सभी स्थानीय ग्रामीणों में भी इस स्थिति को लेकर चिंता व्याप्त है। उनका कहना है कि यदि इन सरोवरों की नियमित सफाई, रखरखाव और जल संरक्षण के उपाय समय रहते नहीं किए गए, तो यह योजना केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।ग्रामीणों का कहना है कि आवश्यक है कि प्रशासन और ग्राम पंचायत मिलकर इन अमृत सरोवरों की सुध लें, ताकि वे वास्तव में ?अमृत? बन सकें?गाँव, किसान और पशुओं के लिए जीवनदायिनी स्रोत के रूप में, न कि केवल अधूरी उम्मीदों की कहानी बनकर रह जाएं।