यातायात के नियम तो मौजूद हैं, परंतु अनुपस्थित है धैर्य.....???

यातायात के नियम तो मौजूद हैं, परंतु अनुपस्थित है धैर्य.....???

#Hardoi

यातायात व्यवस्था को लेकर असंतोष अब चर्चा का नहीं,बल्कि रोजमर्रा का अनुभव बन चुका है। चौराहों पर खड़ी ट्रैफिक पुलिस जैसे औपचारिकता है। कुछ लोग इसके रुकने का संकेत नहीं, तेजी से निकल जाने की चुनौती मान लेते हैं। दोपहिया वाहन पर तीन सवारियाँ, बिना हेलमेट दौड़ते वाहन,गलत दिशा से घुसते चालक और ट्रैफिक नियम तोड़ते लोग-ये दृश्य अब अपवाद नहीं रहे, बल्कि सड़कों की सामान्य तस्वीर बन चुके हैं। समस्या केवल नियम तोड़ने तक सीमित नहीं है,बल्कि उसके पीछे छिपी मानसिकता कहीं अधिक गंभीर है।

यातायात जाम का सबसे बड़ा कारण सड़कों की कमी नहीं और न ही केवल वाहनों की बढ़ती संख्या है। असली वजह है धैर्य की कमी। हर व्यक्ति को यही लगता है कि उसे ही सबसे पहले निकलना है। कुछ सेकंड बचाने की होड़ में लोग गलत दिशा से वाहन घुसा देते हैं, लेन तोड़ देते हैं और दूसरों के अधिकार को नजरअंदाज कर देते हैं। परिणाम यह होता है कि जो रास्ता सुचारु चल सकता था, वह कुछ ही पलों में अव्यवस्थित जाम में बदल जाता है। विडंबना है कि जो जल्दबाजी कुछ मिनट बचाने के लिए की जाती है, वही आधे घंटे या उससे अधिक का समय नष्ट कर देती है।