आध्यात्मिक योग मौन की शक्ति और अमृत स्नान का महापर्व मौनी अमावस्या

आध्यात्मिक योग मौन की शक्ति और अमृत स्नान का महापर्व मौनी अमावस्या

माघ का महीना भारतीय संस्कृति में पुण्य का माह कहा और माना जाता है। इस माह में आने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है।अध्यात्म के शिखर का यह दिन केवल एक तिथि नहीं है। हिंदू दर्शन में महर्षि मनु को इस तिथि का अधिष्ठाता माना गया है। विद्वानों के अनुसार 'मनु' से ही 'मन' बना है,और मौनी अमावस्या 'मन' को जीतने का महापर्व है। हिंदू पंचांग के इस 11वें महीने को कार्तिक माह के समान ही पुण्य मास माना जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में सूर्य,चंद्रमा और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष फल मिलता है।

ज्योतिषीय मान्यता है कि इस दिन पवित्र संगम का जल अमृत के समान हो जाता है। धरती पर देवताओं का वास होता है। जब मकर राशि में चंद्रमा और सूर्य का मिलन होता है, तब मौन व्रत धारण कर साधक अपनी बिखरी ऊर्जा को संचित करता है। इस बार मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी को है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों मकर राशि में होते हैं, जिससे 'शुक्रादित्य राजयोग' जैसी स्थितियां बनती हैं. जो मानसिक शक्ति बढ़ाती हैं। इस दिन का सर्वार्थसिद्धि योग भी सभी राशि के जातकों के लिए शुभ है।

वर्तमान की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहाँ शब्द और शोर हमें घेरे रहते हैं, वहां मौनी अमावस्या हमें 'मौन' कराती है। जब बाहर अंधकार अथवा शांति होती है, तो यह आत्म-अवलोकन के लिए सबसे अच्छा समय होता है। मौन रहने से हम दुनिया के शोर के बजाय अपनी आत्मा की आवाज को सुन पाते हैं।