टांटिया यूनिवर्सिटी के आयुर्वेद संकाय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘दिव्योद्यम’ आरंभ

आवश्यकता और पढ़ाए जा रहे में व्याप्त दूरी को खत्म करना जरूरी: डॉ. मेहरा
श्रीगंगानगर। राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग के अध्यक्ष डॉ. बीएल मेहरा ने कहा है कि आयुर्वेद में जो विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है और जो आज की आवश्यकता है, हमें उसके भीतर की दूरी को खत्म करना है।
वे शुक्रवार को टांटिया यूनिवर्सिटी के आयुर्वेद संकाय (श्रीगंगानगर कॉलेज ऑफ आयुर्वेद साइंस एंड हॉस्पिटल) के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ?दिव्योद्यम? के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस दूरी को खत्म करने के लिए हमें नवाचार तो करने ही होंगे, इस शिक्षण प्रणाली में सुधार लाकर और बेहतर बनाने का प्रयास करना होगा। आज आयुर्वेद की आवश्यकता फिर से महसूस की जा रही है और इसके लिए हम सबको गंभीर होना पड़ेगा। डॉ. मेहरा ने टांटिया यूनिवर्सिटी की प्रशंसा करते हुए वाइस चेयरपर्सन डॉ. मोहित टांटिया के विजन की सराहना की और कहा कि ऐसे दूरदृष्टा व्यक्ति ही देश को आगे ले जा सकते हैं।
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् राजस्थान आयुर्वेद यूनिवर्सिटी, जोधपुर के कुलपति डॉ. गोविंद सहाय शुक्ल ने कहा कि आयुर्वेद देश की मौलिक चिकित्सा पद्धति है। बिना साइड इफेक्ट के जो उपचार करता है, वही आयुर्वेद है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आपको आयुर्वेद का अध्ययन निरंतर करते रहना चाहिए। यह आज की आवश्यकता है। डॉ. शुक्ल ने माना कि आज समस्या इलाज की नहीं है, आज समस्या यह है कि हम स्वस्थ कैसे रहें। आज आम आदमी इलाज की जिन पद्धतियों का उपयोग कर रहा है, उससे साइड इफेक्ट बहुत बढ़ गए हैं, ऐसे में स्वास्थ्य का मार्ग आयुर्वेद से ही निकलेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद दवाओं की मांग बहुत ज्यादा बढ़ने वाली है। ऐसे में हमें चुनौतियों को समझ कर विश्वास को कायम रखने की जरूरत है।
संगोष्ठी में ऑनलाइन जुड़े एनसीआईएसएम, नई दिल्ली में बोर्ड ऑफ एथिक्स एंड रजिस्ट्रेशन के पूर्व अध्यक्ष वैद्य राकेश शर्मा ने कहा कि आज का समय तथ्यात्मक अनुसंधान चाहता है। इसलिए गंभीर होने की जरूरत है। उन्होंने टांटिया यूनिवर्सिटी की प्रशंसा करते हुए डॉ. मोहित टांटिया से कहा कि यह आपके बुजुर्गों, पुरुखों के पुण्य कार्यों का ही प्रतिफल है कि आज आपके विश्वविद्यालय की एक साख है।
गुरु रविदास आयुर्वेद यूनिवर्सिटी, होशियारपुर के कुलसचिव डॉ. संजीव गोयल ने कहा कि कल भी आयुर्वेद का था, आज भी है और कल भी रहेगा। बस दिल से काम करते रहना है। आयुर्वेद का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। उन्होंने यूनिवर्सिटी की विकास यात्रा की भी चर्चा की और इसके और आगे बढ़ने की कामना भी की।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए टांटिया यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. (डॉ.) एम.एम. सक्सेना ने कहा कि आज आयुर्वेद को उद्यम की दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। यह केवल चिकित्सा प्रणाली ही नहीं, विज्ञान भी है। उन्होंने कहा कि आज मार्केटिंग बढ़ रही है। हर कोई आपको कोई न कोई चीज बेचना चाहता है, भले ही आपको उसकी जरूरत है अथवा नहीं। इससे सावधान रहने की आवश्यकता है।
इससे पहले, सभी अतिथियों के साथ यूनिवर्सिटी के कार्यकारी निदेशक डॉ. के.एस. सुखदेव ने भगवान धनवन्तरि के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करके और उप प्राचार्य डॉ. ओमप्रकाश शर्मा ने शांति पाठ करके संगोष्ठी का शुभारंभ किया। प्राचार्य डॉ. रिशु शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया और पीपीटी के माध्यम से यूनिवर्सिटी की प्रगति के बारे में अवगत करवाया। आभार निदेशक (शोध एवं अकादमिक) डॉ. प्रवीण शर्मा ने आभार व्यक्त किया। संचालन कौशल विकास विभाग के डिप्टी को-ऑर्डिनेटर डॉ. विशाल छाबड़ा व सहायक आचार्य डॉ. साक्षी ने किया। इस मौके पर डॉ. रिशु शर्मा, डॉ. साक्षी एवं डॉ. सौरव वर्मा की पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। मुख्य अतिथि के हाथों से डॉ. सुभाष उपाध्याय एवं डॉ. साक्षी को पीएच.डी. की डिग्री भी दिलवाई गई। उन्होंने आयुर्वेद कॉलेज में नए एकेडमिक ब्लॉक और लाइब्रेरी का उद्घाटन भी किया।
संगोष्ठी के दूसरे सत्र में बाहर से आए अनेक प्रतिभागियों ने पत्रवाचन करते हुए आयुर्वेद और उद्यम के संबंध में अपना मत प्रस्तुत किया। संगोष्ठी का समापन शनिवार को होगा।