सोशल मीडिया पर फेमस होने की सनक सिर चढ़ी,पीलीभीत प्रशासन को ठेंगा दिखाते पीलीभीत के कंटेंट क्रिएटर,हाईवे पर धमाकों और रीलबाजी का खेल। आयोजित समारोह में खुले मंच से सम्मानित कर बढ़ावा देते राज

ब्यूरो रिपोर्ट /राजेश गुप्ता लोकेशन/पीलीभीत
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सोशल मीडिया पर फेमस होने की सनक सिर चढ़ी,पीलीभीत प्रशासन को ठेंगा दिखाते पीलीभीत के कंटेंट क्रिएटर,हाईवे पर धमाकों और रीलबाजी का खेल।
आयोजित समारोह में खुले मंच से सम्मानित कर बढ़ावा देते राजनीतिक नेता और व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्वामी।

अब पीलीभीत के विकास की रील इन कंटेंट क्रिएटर के हाथों में पहुंची।

Ankr/पीलीभीत में इन दिनों सोशल मीडिया पर फेमस होने,लाइक और व्यूज बटोरने की होड़ अब सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने लगी है।
पीलीभीत में हाईवे पर गंधक-पोटाश से भरी नाल में धमाके किए जाने के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से सामने आने के बाद राहगीरों लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गयी है, वहीं नौगवां ओवरब्रिज पर देर रात कुछ महिला कंटेंट क्रिएटर्स के डांस करने के वीडियो भी चर्चा में रहे हैं।
यदि लोकप्रियता हासिल करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग और ओवरब्रिज जैसी जगहों को वीडियो बनाने का मंच बनाया जा रहा है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर यह शौक किसकी सुरक्षा की कीमत पर पूरा किया जा रहा है?

गंधक-पोटाश से धमाके का मामला हो या व्यस्त सड़क पर डांस और रील बनाने का, दोनों ही स्थितियों में सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।तेज रफ्तार वाहनों के बीच अचानक धमाका होने से चालक का ध्यान भटक सकता है।वहीं, सड़क या ओवरब्रिज पर असावधानी से की गई शूटिंग यातायात में बाधा और दुर्घटना का कारण बन सकती है।
ऐसे में मात्र कुछ सेकंड की लोकप्रियता के लिए दूसरों की जान जोखिम में डालना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
राष्ट्रीय राजमार्ग कोई फिल्मी सेट नहीं है,जहां मनमर्जी से ऐसी है हठधर्मिता वाली हरकतें की जाएं।यहां हर पल तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही रहती है।ऐसे में सवाल है कि यदि इन गतिविधियों से कोई बड़ा हादसा हो जाए, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन किसी अप्रिय घटना का इंतजार कर रहा है, या समय रहते ऐसे मामलों पर प्रभावी निगरानी और कार्रवाई भी होगी?

महिला सम्मान के भाषण, लेकिन सड़क सुरक्षा पर खामोशी?

इस पूरे मामले में उन सामाजिक संगठनों और समाज के स्वयंभू ठेकेदारों की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं, जो महिला सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक मर्यादाओं पर बड़े-बड़े मंचों से भाषण देते हैं।

यदि सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षित तरीके से रील बनाने की घटनाएं उनके संज्ञान में आती हैं, तो क्या उनकी जिम्मेदारी केवल मंचों से बयान देने तक सीमित है?

सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार सोशल मीडिया व्यवहार को लेकर जागरूकता की पहल क्यों नहीं दिखाई देती?

हालांकि, किसी युवती का डांस करना अपने आप में महिला सम्मान के विरुद्ध नहीं है। असली सवाल यह है कि वीडियो बनाने के दौरान यातायात नियमों, सार्वजनिक सुरक्षा और दूसरों के अधिकारों का ध्यान रखा जा रहा है या नहीं। यही कसौटी पुरुष और महिला, दोनों तरह के कंटेंट क्रिएटर्स पर समान रूप से लागू होनी चाहिए।

सवाल अब उन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और जनप्रतिनिधियों से भी है, जो अपने प्रचार- प्रसार के लिए इस प्रकार के सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स को मंच देते हैं और उन्हें सम्मानित करते हैं।किसी क्रिएटर की लोकप्रियता उसके लाखों व्यूज या वायरल वीडियो से मापी जा सकती है, लेकिन क्या सार्वजनिक जीवन में उसकी जिम्मेदारी और सामाजिक व्यवहार को भी महत्व दिया जाना चाहिए?

यदि किसी क्रिएटर के वीडियो में सार्वजनिक सुरक्षा की अनदेखी दिखाई देती है,तो क्या उसे केवल लोकप्रियता के आधार पर प्रचार का चेहरा बनाना उचित है? क्या प्रतिष्ठानों और जनप्रतिनिधियों की कोई सामाजिक जिम्मेदारी नहीं है कि वे अपने मंचों पर ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करें, जो मनोरंजन के साथ जिम्मेदार नागरिक व्यवहार का भी परिचय देते हों?

सवाल यह नहीं कि किसके कितने फॉलोअर्स हैं, बल्कि यह है कि लोकप्रियता की दौड़ में नागरिक जिम्मेदारी कहां छूट रही है। सम्मान और प्रोत्साहन केवल सोशल मीडिया की पहुंच देखकर नहीं, बल्कि जिम्मेदार व्यवहार को भी ध्यान में रखकर दिया जाना चाहिए। हालांकि, किसी व्यक्ति को सम्मानित किए जाने मात्र से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सम्मान देने वाला प्रतिष्ठान या जनप्रतिनिधि संबंधित गतिविधियों का समर्थन करता है।

अब जरूरत है कि पुलिस और प्रशासन वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच करें, राष्ट्रीय राजमार्ग और ओवरब्रिज पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करें तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर उचित कार्रवाई करें। साथ ही, सामाजिक संगठनों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और जनप्रतिनिधियों को भी यह विचार करना चाहिए कि वे किस तरह की सोशल मीडिया संस्कृति को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करना किसी का निजी लक्ष्य हो सकता है, लेकिन सार्वजनिक सड़क को जोखिम में डालकर ऐसा करने का अधिकार किसी को नहीं है। सवाल सिर्फ रील, डांस या धमाके का नहीं, बल्कि उस सामाजिक सोच का भी है, जिसमें जिम्मेदारी से ज्यादा लोकप्रियता और व्यवहार से ज्यादा प्रचार को महत्व दिया जाने लगा है। क्या जिम्मेदार तंत्र किसी बड़े हादसे से पहले जागेगा, या फिर घटना के बाद कार्रवाई की औपचारिकता निभाई जाएगी?