कवच से स्वदेशी तकनीक तक, बीजीकेटी लोको शेड ने मजबूत की रेल सुरक्षा

कवच से स्वदेशी तकनीक तक, बीजीकेटी लोको शेड ने मजबूत की रेल सुरक्षा

पांच माह में 66 इलेक्ट्रिक इंजनों में कवच फिटमेंट, लोको फेलियर में भी आई उल्लेखनीय कमी

जोधपुर। ट्रेनों की सुरक्षित और सुचारु आवाजाही में लोको शेड की अनुरक्षण व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भगत की कोठी लोको शेड (बीजीकेटी) अब आधुनिक तकनीक, बेहतर अनुरक्षण और स्वदेशी नवाचार के जरिए रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती दे रहा है। कभी डीजल इंजनों के अनुरक्षण के लिए पहचान रखने वाला यह शेड अब इलेक्ट्रिक लोको, सुरक्षा तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।

पांच माह में 66 इलेक्ट्रिक इंजनों में कवच फिटमेंट

बीजीकेटी लोको शेड की प्रमुख उपलब्धियों में इलेक्ट्रिक इंजनों में ?कवच? सुरक्षा प्रणाली की फिटमेंट शामिल है। निर्धारित 132 इलेक्ट्रिक इंजनों में से पांच माह के दौरान 66 इंजनों में कवच लगाया जा चुका है। यानी कुल निर्धारित इंजनों में 50 प्रतिशत लोको में कवच फिटमेंट का कार्य पूरा हो गया है। शेष इंजनों में भी चरणबद्ध तरीके से फिटमेंट किया जा रहा है। वहीं, भविष्य में बनने वाले नए इलेक्ट्रिक लोको में कवच प्रणाली पहले से उपलब्ध रहेगी।

लोको फेलियर में आई बड़ी कमी

तकनीकी सुधारों और बेहतर अनुरक्षण का असर इंजनों की विश्वसनीयता पर भी देखने को मिला है। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में एचएचपी डीजल लोको फेलियर में 40 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक लोको फेलियर में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा रेलवे बोर्ड के निर्धारित लक्ष्य की तुलना में डीजल लोको आउटेज में 21 प्रतिशत और इलेक्ट्रिक लोको आउटेज में छह प्रतिशत सुधार हुआ है।

स्वदेशी तकनीक से इंजन की जांच

शेड में विकसित किया गया ?पी पाइप फ्लो टेस्ट बेंच? स्वदेशी तकनीकी नवाचार का बेहतरीन उदाहरण है। इसके माध्यम से पिस्टन कूलिंग पाइपों को इंजन में फिट करने से पहले उनकी ऑयल फ्लो और स्प्रे क्षमता की जांच की जाती है। इससे खराब या मानक के अनुरूप नहीं पाए जाने वाले पाइपों की पहचान पहले ही हो जाती है और इंजन में संभावित खराबी एवं नुकसान की आशंका को कम किया जा सकता है।

उपयोगी उपकरणों का किया पुन: उपयोग

संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में भी बीजीकेटी लोको शेड ने महत्वपूर्ण पहल की है। शेड द्वारा 4.73 करोड़ रुपये मूल्य के 84 उपयोगी लोको उपकरण विभिन्न रेलवे शेडों, कार्यशालाओं और उत्पादन इकाइयों को उपलब्ध कराए गए हैं। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित होने के साथ रेलवे के खर्च को भी कम करने में मदद मिल रही है।

तीन माह में 21 लोको का अनुरक्षण

शेड में तीन माह के दौरान 10 इलेक्ट्रिक लोको के टीओएच और 11 एचएचपी डीजल लोको के प्रमुख अनुरक्षण शेड्यूल पूरे किए गए। इससे लोको की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिली है।

मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी के अनुसार आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण अनुरक्षण और स्वदेशी नवाचार के माध्यम से बीजीकेटी लोको शेड रेलवे के ?सुरक्षा पहले? के संकल्प को मजबूती प्रदान कर रहा है।

पानी की बचत पर भी जोर

बीजीकेटी लोको शेड में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। शेड में मौजूद 181 इलेक्ट्रिक लोको में से 77 में जलरहित यूरिनल लगाए जा चुके हैं। इससे पानी की खपत कम करने के साथ अनुरक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में भी मदद मिल रही है।

बीजीकेटी लोको शेड में किए जा रहे ये तकनीकी और पर्यावरणीय बदलाव केवल शेड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका सीधा असर ट्रेनों की सुरक्षा, लोको की विश्वसनीयता और रेलवे के सुरक्षित संचालन पर पड़ रहा है। कवच फिटमेंट से लेकर स्वदेशी तकनीक और संसाधनों के पुन: उपयोग तक, शेड लगातार आधुनिक और सुरक्षित रेल संचालन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।