कोरबा में 50 करोड़ ठगी के आरोपी की तलाश में ‘हवाई सफर’, खाली हाथ लौटी पुलिस टीम, आईजी ने थानेदार समेत 8 पुलिसकर्मियों को किया सस्पेंड

CITIUPDATE NEWS(संतोष सारथी)कोरबा में करीब 50 करोड़ रुपये की ठगी के आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली गई पुलिस टीम के हवाई सफर को लेकर बड़ी कार्रवाई हुई है। आरोप है कि फरार आरोपी की तलाश में दिल्ली जाने के लिए पुलिस टीम ने ट्रेन के बजाय फ्लाइट का इस्तेमाल किया और यात्रा का खर्च पीड़ित पक्ष से लिया गया। मामला सामने आने के बाद आईजी रामगोपाल गर्ग ने कटघोरा थाना प्रभारी समेत 8 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। आईजी की इस कार्रवाई ने पुलिस की कार्यप्रणाली, अनुशासन और विवेचना के दौरान खर्च की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक पूरा मामला कटघोरा थाना क्षेत्र में एक वाहन एजेंसी संचालक से करीब 50 करोड़ रुपये की कथित ठगी से जुड़ा है। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और साइबर सेल की मदद से फरार आरोपी की लोकेशन दिल्ली में ट्रेस की। आरोपी के दिल्ली में होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम को उसकी गिरफ्तारी के लिए रवाना किया गया। नियमानुसार ट्रेन से दिल्ली जाने के बजाय कटघोरा थाना और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने फ्लाइट से यात्रा की। आरोप है कि पुलिस टीम के दिल्ली जाने के लिए एयर टिकट की व्यवस्था पीड़ित वाहन एजेंसी संचालक के पैसों से की गई। जिसके बाद कटघोरा थाना प्रभारी एमबी पटेल के नेतृत्व में कुल 8 सदस्यीय टीम दिल्ली रवाना हुई।

बताया जा रहा है कि मामला तब बिगड़ गया, जब दिल्ली से पुलिस की टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। फिर क्या था एजेंसी के संचालक द्वारा इस पूरे मामले की शिकायत सीधे बिलासपुर रेंज आईजी रामगोपाल गर्ग से कर दी। मामला सामने आने के बाद आईजी ने पूरे प्रकरण की जानकारी ली और कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद कटघोरा थाना प्रभारी समेत टीम के 8 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबित पुलिसकर्मियों में कटघोरा थाना प्रभारी एमबी पटेल, विवेचना अधिकारी राम पांडेय, आरक्षक प्रदीप राठौर, प्रधान आरक्षक गोपाल यादव, प्रधान आरक्षक राजेश कंवर, साइबर थाना के प्रधान आरक्षक गुनाराम सिन्हा, सुशील यादव और लाइन में पदस्थ आरक्षक प्रशांत सिंह शामिल हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर कोरबा पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मसलन कि क्या किसी आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम को अपनी निर्धारित प्रक्रिया के बजाय पीड़ित पक्ष के खर्च पर यात्रा करने की अनुमति थी ? अगर नहीं, तो यह व्यवस्था किस स्तर पर हुई और इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को क्यों नहीं हुई ? दूसरा सवाल यह भी है कि जब टीम आरोपी की लोकेशन तक पहुंच गई थी, तो गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकी ?

IG की कार्रवाई ने दिया सख्त संदेश
हालांकि पूरे मामले की विस्तृत जांच अभी सामने आना बाकी है, लेकिन आईजी रामगोपाल गर्ग की तत्काल कार्रवाई ने पुलिस महकमे में स्पष्ट संदेश दिया है कि विवेचना के दौरान नियमों की अनदेखी, अनुशासनहीनता या संदिग्ध तरीके से खर्च का मामला सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी। 50 करोड़ की ठगी जैसे गंभीर मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के बजाय पुलिस टीम खुद सवालों के घेरे में आ गई। अब इस मामले में जांच से यह साफ होगा कि हवाई यात्रा का फैसला किस स्तर पर लिया गया, पीड़ित पक्ष के पैसों के इस्तेमाल की वास्तविकता क्या थी और इस पूरी कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।