स्वतंत्रता दिवस पर डीएफओ के हाथों डिप्टी रेंजर से लेकर वन दरोगा व  कर्मचारियों को भी मिला सम्मान डीएफओ के हाथों सम्मान पाकर गदगद हुए वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी 

संवाददाता कार्तिकेय पाण्डेय

चकिया।जंगल की सुरक्षा और संरक्षण के आदेश तो दफ्तर की ठंडी मेजों पर लिखे जाते हैं, लेकिन उस आदेश को लागू करने की असली जंग जंगल की कठिन पगडंडियों पर लड़ी जाती है। कड़ी धूप, मूसलाधार बारिश, कड़ाके की ठंड और अंधेरी रातों में वन्यजीवों और पेड़-पौधों की हिफाजत करने वाले कर्मचारियों को आखिर पहचान कब मिलती है? इस सवाल का बेहद खूबसूरत जवाब 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर काशी वन्य जीव प्रभाग, रामनगर में देखने को मिला। यहाँ प्रभागीय वनाधिकारी बी. शिवशंकर ने उन कर्मचारियों को सम्मानित किया जो वाकई में जमीन पर मोर्चा संभालते हैं

डीएफओ बी. शिवशंकर ने कहा कि अधिकारियों का काम दफ्तर में बैठकर योजनाएं बनाना और आदेश जारी करना है। लेकिन उन योजनाओं को जंगल की जमीन पर उतारना फील्ड स्टाफ की ही मेहनत होती है। जंगल में हरियाली बढ़ाने, नए पौधों की देखरेख करने, अवैध कब्जों को रोकने और वन्यजीवों को शिकारियों से बचाने में सबसे बड़ी भूमिका इन्हीं कर्मचारियों की होती है। इसलिए सम्मान और सराहना के असली हकदार भी वही हैं जो दिन-रात चौकियों पर पहरा देते हैं।

*डिप्टी रेंजर से लेकर वनरक्षकों तक को मिला सम्मान*
इस बार का स्वतंत्रता दिवस समारोह खास रहा क्योंकि सम्मान केवल बड़े अधिकारियों तक सिमटकर नहीं रहा। उत्कृष्ट कार्यों के लिए चकिया रेंज के डिप्टी रेंजर आनंद दुबे को प्रशस्ति पत्र दिया गया। इसके अलावा चंद्रप्रभा रेंज के वन दरोगा रिशु चौबे, को भी मंच से सम्मानित किया गया। वहीं वनरक्षक वर्ग में प्रेम सिंह, आदित्य सिंह, मंदीप कुमार, बबुंदर यादव और शिव बख्श सिंह की जमीनी मेहनत को सराहा गया।

*दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की मेहनत को भी सलाम*
चकिया।विभाग ने उन दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को भी सम्मान दिया जो बहुत ही विषम परिस्थितियों में काम करते हैं। इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी सिर्फ पौधे लगाना नहीं होता, बल्कि वे पूरे वनांचल की निगरानी, पौधों की सुरक्षा और आपात स्थिति में वन्यजीवों की रक्षा में भी जी-जान से जुटे रहते हैं। विभाग ने यह साफ संदेश दिया कि जंगल बचाने की इस कड़ी में जुड़ा हर एक इंसान बेहद महत्वपूर्ण है।

*एक साल की उपलब्धियों का श्रेय जमीनी टीम को मिला*
डीएफओ बी. शिवशंकर ने कहा कि बीते एक साल के दौरान काशी वन्य जीव प्रभाग ने अतिक्रमण हटाने, पौधरोपण करने और वन्यजीव संरक्षण में जो बड़ी सफलताएं हासिल की हैं, उसका पूरा श्रेय फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को जाता है। उन्होंने कहा कि कोई भी योजना कागजों में चाहे कितनी भी अच्छी हो, वह तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक जमीन पर खड़ा कर्मचारी उसे ईमानदारी से लागू न करे। सम्मान मिलते ही वनकर्मियों के चेहरे खिल उठे और उनमें आगे भी बेहतर काम करने का नया उत्साह देखने को मिला