इंसानियत की मिसाल: बदायूं में मुस्लिम भाई ने निभाया फर्ज, हिंदू बहन का कन्यादान कर कराई शादी

बदायूं (उझानी): आज के दौर में जब समाज में नफरत फैलाने की तमाम कोशिशें की जा रही हैं, वहीं बदायूं के उझानी से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश कर दी है। यहाँ एक मुस्लिम भाई ने अपनी हिंदू बहन का फर्ज निभाते हुए न केवल उसका कन्यादान किया, बल्कि धूमधाम से उसका विवाह भी संपन्न कराया।

कोरोना काल में बनी ढाल

मिली जानकारी के अनुसार, उझानी निवासी दीपांशी के माता-पिता का निधन कोरोना काल के दौरान हो गया था। उस दुखद समय में दीपांशी पूरी तरह से अकेली पड़ गई थी। ऐसे में बबलू सिद्दीकी और उनकी पत्नी ने उसे सहारा दिया और अपने परिवार का अभिन्न हिस्सा बनाकर उसका पालन-पोषण किया।

भाई का फर्ज और बेटी की विदाई

बबलू सिद्दीकी ने दीपांशी के पिता होने का दायित्व समझते हुए उसके विवाह की जिम्मेदारी उठाई। उन्होंने मोहल्ले के ही कमलकांत के साथ दीपांशी का रिश्ता तय किया और पूरे रीति-रिवाज के साथ उसका कन्यादान किया। विवाह के पश्चात दीपांशी और उसके पति कमलकांत ने बबलू सिद्दीकी का पैर छूकर आभार व्यक्त किया और उन्हें एक अभिभावक के रूप में मान-सम्मान दिया।

धर्म से ऊपर इंसानियत

यह घटना इस बात का प्रमाण है कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। बबलू सिद्दीकी और दीपांशी के इस रिश्ते ने साबित कर दिया है कि खून के रिश्तों से कहीं बढ़कर मानवीय संवेदनाएं होती हैं। यह खबर न केवल समाज के लिए एक प्रेरणा है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि हमारे देश की मिट्टी में आज भी एकता और भाईचारे की खुशबू कायम है, जिसे नफरत की कोई भी दीवार मिटा नहीं सकती।