पठानकोट से देशभर में भेजी गई 8.3 टन लीची, रेलवे बना किसानों के लिए भरोसेमंद परिवहन माध्यम

जम्मू। उत्तर रेलवे के जम्मू मंडल द्वारा किसानों और व्यापारियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में पंजाब के पठानकोट कैंट रेलवे स्टेशन से 8.3 टन लीची की सफल पार्सल लोडिंग कर देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा गया है, जिससे स्थानीय किसानों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिली है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, लीची की यह खेप बांद्रा टर्मिनस, सूरत, अहमदाबाद और सहारनपुर सहित कई प्रमुख स्थानों के लिए एसएलआर (सामान यान) के माध्यम से रवाना की गई। लीची सीजन के दौरान यह सेवा लगातार जारी है और किसानों के लिए तेजी से एक विश्वसनीय परिवहन विकल्प बनती जा रही है।

रेलवे की पार्सल सेवा के जरिए ताजे फल कम समय में सुरक्षित तरीके से देश के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचाए जा रहे हैं। इससे किसानों को न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि उनके उत्पाद की गुणवत्ता भी बनी रहती है।

इस सेवा के कई फायदे सामने आए हैं। रेल परिवहन के जरिए लीची जैसे जल्दी खराब होने वाले फल लगभग 24 घंटे के भीतर बाजार तक पहुंच रहे हैं। सड़क मार्ग की तुलना में यह सेवा कम खर्चीली साबित हो रही है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है। साथ ही अब पठानकोट की लीची देश के बड़े बाजारों तक सीधे पहुंच रही है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है। रेलवे की सुरक्षित हैंडलिंग व्यवस्था से माल को नुकसान भी बेहद कम हो रहा है।

इस उपलब्धि पर वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक उचित सिंघल ने कहा कि जम्मू मंडल कृषि उत्पादों के परिवहन को प्राथमिकता दे रहा है। पार्सल लोडिंग सेवा किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ किसान रेल की अवधारणा को भी मजबूत कर रही है। उन्होंने अधिक से अधिक किसानों से रेलवे की इस सुविधा का लाभ उठाने की अपील की।

रेलवे प्रशासन ने बताया कि लीची सीजन को देखते हुए पार्सल वैन के साथ लोडिंग और अनलोडिंग की विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि किसानों और व्यापारियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। रेलवे की यह पहल किसानों के लिए आर्थिक मजबूती और कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।