हाईवे किनारे टेंट में खड़े 'अमृत भारत' ट्रेन इंजन बॉडी शेल का रहस्य गहराया, शिकायत के बाद रातों-रात गायब हुई संरचना

परसों जीएसटी विभाग में शिकायत के बाद अगले ही दिन हटा दी गई पूरी संरचना

सम्बन्धित अधिकारियों ने जताई अनभिज्ञता, मानको पर खरे न उतरने पर पहले भी रद्द किए जाने की बात आई सामने

चंदौली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 'अमृत भारत' ट्रेन परियोजना से जुड़ी बताई जा रही लोकोमोटिव बॉडी शेल को लेकर चंदौली-बिहार बॉर्डर पर नया और रहस्यमय मोड़ सामने आया है। बिहार के कैमूर जिले के दुर्गावती-भभुआ क्षेत्र में नौबतपुर बॉर्डर के पास हाईवे किनारे टेंट के नीचे पिछले करीब एक महीने से खड़ी भारी-भरकम इंजन बॉडी शेल को लेकर पहले ही सवाल उठ रहे थे। इसी बीच परसों बिहार जीएसटी विभाग में इसकी शिकायत की गई और शिकायत के महज 24 घंटे के भीतर ही कल रात पूरी संरचना रहस्यमय तरीके से वहां से गायब हो गई।

स्थानीय लोगों के अनुसार, करोड़ों रुपये की रेलवे परियोजना से जुड़ी इतनी संवेदनशील संरचना का खुले हाईवे किनारे दिनों तक रखा जाना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। लेकिन शिकायत के तुरंत बाद रातों-रात उसका हटाया जाना पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना रहा है। लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर किसके निर्देश पर और किस उद्देश्य से इतनी बड़ी संरचना को आनन-फानन में हटाया गया।

मामले में जब बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के जनसंपर्क अधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जानकारी होने से इनकार किया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि उक्त लोकोमोटिव बॉडी शेल दोबारा बरेका लाई जाती है तो उसकी पूरी तकनीकी जांच और पड़ताल की जाएगी तथा निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर सही नहीं पाए जाने पर उसे पुनः निरस्त (कैंसिल) कर दिया जाएगा।

वहीं, बिहार जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने भी मामले को लेकर अनभिज्ञता जाहिर की। बाद में दोबारा जानकारी लेने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने फोन नहीं उठाया, जिससे पूरे प्रकरण को लेकर रहस्य और गहरा गया है।

अब चंदौली-बिहार बॉर्डर के दुर्गावती, भभुआ और आसपास के क्षेत्रों में एक ही सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है?परसों जीएसटी विभाग में शिकायत होने के बाद आखिर अगले ही दिन रातों-रात 'अमृत भारत' लोकोमोटिव बॉडी शेल को किसने, क्यों और कहां हटाया? इस पूरे मामले पर रेलवे, जीएसटी विभाग और संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।