जम्मू सीनियर डीसीएम उचित सिंघल की निगरानी में चेकिंग स्टाफ ने दिखाई फुर्ती, बिछड़े बच्चे को मिलाया परिवार से

जम्मू मंडल के चेकिंग स्टाफ की सतर्कता ने मिलाया बिछड़ा मासूम, मानवता और सेवा का दिया उत्कृष्ट उदाहरण

जम्मू। भारतीय रेलवे केवल यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने का माध्यम ही नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में उनका सहारा भी बन रहा है। इसका एक भावुक और प्रेरणादायक उदाहरण जम्मू मंडल में देखने को मिला, जहां टिकट चेकिंग स्टाफ की सतर्कता और तत्परता से अपने माता-पिता से बिछड़ा तीन वर्षीय मासूम सकुशल अपने परिवार से मिल गया।

गाड़ी संख्या 22429 में ड्यूटी के दौरान टिकट चेकिंग स्टाफ के सदस्य आशीष कुमार ने कोच संख्या डी-1 में एक छोटे बच्चे को अकेले रोते हुए देखा। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने तत्काल गाड़ी के कंडक्टर एवं मुख्य टिकट निरीक्षक विजय कुमार को सूचना दी। सूचना मिलते ही पूरी टीम सक्रिय हो गई और बच्चे के परिजनों की तलाश शुरू कर दी।

जम्मू मंडल के चेकिंग स्टाफ ने बिना समय गंवाए ट्रेन के सभी कोचों में खोज अभियान चलाया। उनकी मेहनत और सजगता रंग लाई तथा जनरल कोच में बच्चे के चिंतित और परेशान माता-पिता को खोज लिया गया। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद मासूम को सुरक्षित उसके परिजनों को सौंप दिया गया।

अपने बच्चे को सही-सलामत वापस पाकर माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने जम्मू मंडल के टिकट चेकिंग स्टाफ का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कर्मचारियों की तत्परता ने उनके परिवार को बड़ी पीड़ा से बचा लिया।

रेलवे प्रशासन ने भी इस सराहनीय कार्य के लिए चेकिंग स्टाफ की प्रशंसा की है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक उचित सिंघल ने कहा कि यह घटना जम्मू मंडल के ?यात्री सर्वोपरि? सेवा संकल्प की सच्ची मिसाल है। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा मंडल के कर्मचारी हर परिस्थिति में सेवा के लिए तत्पर रहते हैं।

यह घटना न केवल रेलवे कर्मचारियों की जिम्मेदारी और कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि भारतीय रेलवे के लिए हर यात्री और उसका परिवार महत्वपूर्ण है। जम्मू मंडल के कर्मचारियों की इस मानवीय पहल की यात्रियों और आमजन द्वारा व्यापक सराहना की जा रही है।