राजधानी एक्सप्रेस में डीआरएम का अनोखा सफर, 100 से अधिक यात्रियों से सीधे संवाद कर लिया फीडबैक

राजधानी एक्सप्रेस में डीआरएम का अनोखा सफर, 100 से अधिक यात्रियों से सीधे संवाद कर लिया फीडबैक

अहमदाबाद। यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और रेल सेवाओं में निरंतर सुधार के उद्देश्य से पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल ने एक अनूठी पहल की। मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) वेद प्रकाश ने नई दिल्ली?साबरमती स्वर्ण जयंती राजधानी एक्सप्रेस में स्वयं यात्रा कर 100 से अधिक यात्रियों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं, सुझावों तथा अनुभवों को जाना।

यात्रा के दौरान डीआरएम ने फर्स्ट एसी, सेकंड एसी और थर्ड एसी कोचों का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और कामकाजी युवाओं से उनकी सीटों पर जाकर बातचीत की तथा स्वच्छता, खानपान, सुरक्षा और अन्य यात्री सुविधाओं के बारे में फीडबैक लिया।

निरीक्षण के दौरान कोचों की साफ-सफाई, ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस (ओबीएचएस), शौचालयों की स्थिति और यात्रियों को उपलब्ध कराए जाने वाले लिनन की गुणवत्ता की समीक्षा की गई। जांच में तीन एसी कोचों में ताजा लिनन उपलब्ध नहीं मिलने पर संबंधित वेंडर पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं भोजन की गुणवत्ता की जांच के दौरान मानक के अनुरूप चावल उपलब्ध नहीं कराने पर एक अन्य वेंडर पर भी एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

यात्रियों ने रेलवे सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। इनमें सबसे आकर्षक सुझाव युवाओं और कॉरपोरेट पेशेवरों की ओर से आया। उन्होंने राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनों में ?वर्किंग कोच? की व्यवस्था करने का प्रस्ताव रखा, जहां देर रात तक लैपटॉप पर काम करने वाले यात्री अन्य सहयात्रियों की नींद प्रभावित किए बिना अपना कार्य कर सकें।

इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों और महिला यात्रियों ने लोअर बर्थ आवंटन और सुरक्षा से जुड़े सुझाव भी साझा किए।

इस अवसर पर डीआरएम वेद प्रकाश ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और संतुष्टि भारतीय रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यात्रियों से मिलने वाला जमीनी फीडबैक सेवाओं में सुधार का सबसे प्रभावी माध्यम है और रेलवे ऐसे सुझावों को गंभीरता से लेकर लगातार सुधार की दिशा में कार्य कर रहा है।

यात्रियों ने भी डीआरएम की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी का सीधे सीट तक पहुंचकर सुझाव और समस्याएं सुनना एक सकारात्मक बदलाव है। उनका मानना है कि इस प्रकार के संवाद से रेलवे प्रशासन और यात्रियों के बीच विश्वास और सहभागिता और अधिक मजबूत होगी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार भविष्य में भी इस तरह के सीधे संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे यात्रियों की जरूरतों के अनुरूप रेल सेवाओं को और अधिक आधुनिक, पारदर्शी तथा जनहितैषी बनाया जा सके।