अमृत भारत स्टेशन योजना से सूरतगढ़ स्टेशन का कायाकल्प, यात्रियों, व्यापारियों और वायुसेना कर्मियों को मिली आधुनिक सुविधाएं

अमृत भारत स्टेशन योजना से बदली सूरतगढ़ स्टेशन की तस्वीर, यात्रियों और व्यापारियों को मिल रही आधुनिक सुविधाएं

सूरतगढ़। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत सूरतगढ़ रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों ने क्षेत्र के विकास को नई गति दी है। लगभग 20.25 करोड़ रुपये की लागत से किए जा रहे पुनर्विकास कार्यों के प्रथम चरण के पूरा होने के बाद स्टेशन पर यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलने लगी हैं। इससे स्थानीय व्यापारियों, सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन के कर्मचारियों, वायुसेना स्टेशन कर्मियों तथा आम यात्रियों का आवागमन अधिक सुगम और सुविधाजनक हो गया है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार, पुनर्विकास कार्यों के तहत स्टेशन भवन का व्यापक आधुनिकीकरण किया गया है। स्टेशन पर प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग विकसित किए गए हैं। इसके अलावा बाउंड्री वॉल, सर्कुलेटिंग एरिया का सौंदर्यीकरण, दोपहिया और चौपहिया वाहनों के लिए पृथक पार्किंग व्यवस्था, बुकिंग कार्यालय, रिटायरिंग रूम और नए टॉयलेट ब्लॉकों का निर्माण पूरा किया जा चुका है।

स्टेशन को आकर्षक बनाने के लिए एलईडी लाइटिंग और दीवारों पर स्थानीय कला एवं संस्कृति को दर्शाने वाले आर्टवर्क किए गए हैं। मुख्य प्रवेश द्वार को विशेष रूप से सजाया गया है, जहां स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती आकर्षक पेंटिंग्स बनाई गई हैं। दिव्यांगजन यात्रियों की सुविधा के लिए उपयुक्त साइनेज भी लगाए गए हैं।

यात्रियों को बेहतर सूचना उपलब्ध कराने के लिए कोच गाइडेंस डिस्प्ले बोर्ड, मल्टीलाइन एवं सिंगल लाइन डिस्प्ले बोर्ड, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, बड़े एलईडी स्क्रीन और जीपीएस आधारित डिजिटल क्लॉक स्थापित किए गए हैं। वहीं स्टेशन पर लगभग 9.96 करोड़ रुपये की लागत से 12 मीटर चौड़ा फुट ओवर ब्रिज भी बनाया जाएगा।

हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्टेशन पर लगभग 22 लाख रुपये की लागत से 50 किलोवाट क्षमता का सोलर ऊर्जा प्लांट भी स्थापित किया गया है, जिससे स्टेशन की प्रकाश व्यवस्था और तकनीकी कार्यों के संचालन में मदद मिलेगी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों से स्थानीय कारीगरों और मजदूरों को रोजगार मिला है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है। साथ ही पर्यटन, स्थानीय हस्तशिल्प और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.