सेंट्रल रेलवे की बड़ी पहल: वाडीबंदर में अत्याधुनिक बायो-टॉयलेट टेस्टिंग लैब शुरू, ट्रेनों में स्वच्छता और सफर होगा बेहतर

मुंबई। सेंट्रल रेलवे ने यात्रियों को स्वच्छ,दुर्गंध मुक्त और पर्यावरण अनुकूल यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुंबई मंडल के वाडीबंदर कोचिंग डिपो में अत्याधुनिक बायो-टॉयलेट एनेरोबिक माइक्रोबियल इनोकुलम (AMI) टेस्टिंग लैब स्थापित की गई है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।सेंट्रल रेलवे ने अपने सभी 128 नियमित मेल एवं एक्सप्रेस ट्रेनों के 5,509 कोचों में लगभग 22,306 बायो-टॉयलेट लगाकर 100 प्रतिशत बायो-टॉयलेट फिटमेंट का लक्ष्य हासिल कर लिया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस आधुनिक प्रणाली से अब ट्रेनों से मानव अपशिष्ट सीधे पटरियों पर नहीं गिरेगा, जिससे स्टेशन और ट्रैक पहले की तुलना में अधिक स्वच्छ रहेंगे।भारतीय रेलवे ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के सहयोग से बायो-टॉयलेट तकनीक विकसित की थी। इस तकनीक में विशेष प्रकार के एनेरोबिक बैक्टीरिया मानव अपशिष्ट को जैविक प्रक्रिया के जरिए गैस और गंध रहित पानी में परिवर्तित कर देते हैं। इससे न केवल दुर्गंध कम होती है बल्कि पर्यावरण और रेलवे ट्रैक की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।रेलवे ने बताया कि बायो-टॉयलेट प्रणाली की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नियमित रूप से इनोकुलम सैंपलों की जांच की जाती है। इसके लिए वाडीबंदर कोचिंग डिपो में स्थापित नई लैब में पीएच स्तर, बायोगैस निर्माण, मीथेन प्रतिशत, बैक्टीरिया की सक्रियता और अन्य महत्वपूर्ण मानकों की जांच की जाएगी।यह लैब भारतीय रेलवे की ओपन लाइन प्रणाली में अपनी तरह की शुरुआती अत्याधुनिक सुविधाओं में से एक है, जहां सभी आवश्यक परीक्षण मशीनें एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। लैब में गैस क्रोमैटोग्राफ, लैमिनार एयर फ्लो चैंबर, बीओडी इनक्यूबेटर, बैक्टीरियोलॉजिकल इनक्यूबेटर, ऑटोक्लेव और अन्य आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं।सेंट्रल रेलवे ने जून 2025 में पहली विशेष बायो-टॉयलेट टेस्टिंग लैब शुरू की थी, लेकिन ट्रेनों और सैंपलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अप्रैल 2026 में एक अतिरिक्त लैब को भी शुरू कर दिया गया। यह लैब अब सेंट्रल रेलवे के सभी कोचिंग डिपो के लिए केंद्रीय परीक्षण केंद्र के रूप में कार्य करेगी।रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस आधुनिक लैब के शुरू होने से ट्रेनों में बायो-टॉयलेट की गुणवत्ता और बेहतर होगी, यात्रियों को साफ-सुथरे एवं दुर्गंध मुक्त शौचालय मिलेंगे और लंबी दूरी की यात्रा अधिक आरामदायक बनेगी। इससे रेलवे ट्रैक और स्टेशन परिसर भी स्वच्छ रहेंगे, जो स्वच्छ भारत-स्वच्छ रेल मिशन को मजबूती प्रदान करेगा।सेंट्रल रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे बायो-टॉयलेट का सही तरीके से उपयोग करें और प्लास्टिक बोतलें, पॉलीथीन, सैनिटरी नैपकिन, कपड़े या अन्य ठोस वस्तुएं टॉयलेट में न डालें, ताकि व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्निल नीला ने कहा कि सेंट्रल रेलवे स्वच्छ और हरित भारत के राष्ट्रीय मिशन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह पहल तकनीकी प्रगति, पर्यावरण संरक्षण तथा यात्रियों को बेहतर स्वच्छता सुविधा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।