मुंगेली के प्रतिष्ठित मिशनरी स्कूल पर "अवैध कब्ज़ा और वित्तीय अनियमितता" का आरोप;सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता कर छत्तीसगढ़ डायोसीस बोर्ड ने खोला मोर्चा

मुंगेली/छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ शिक्षा जगत को शर्मसार किया है, बल्कि स्थानीय जिला एवं पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बहुत गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंगेली के प्रतिष्ठित मिशनरी संस्थान 'रेन्बो मेमोरियल इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल' पर कुछ भू-माफिया और असामाजिक तत्वों द्वारा जबरन,असंवैधानिक और आपराधिक तरीके से कब्ज़ा कर लिया गया है।इस पूरे सनसनीखेज घटनाक्रम को लेकर छत्तीसगढ़ डायोसीस बोर्ड ऑफ़ एजुकेशन (CDBE),चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के शीर्ष पदाधिकारियों ने स्थानीय सर्किट हाउस में रविवार को प्रेसवार्ता बुलाई। प्रेसवार्ता में बोर्ड के पदाधिकारियों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि शासन-प्रशासन को दर्जनों बार लिखित शिकायतें और साक्ष्य सौंपे जाने के बावजूद,जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। प्रशासन की इसी रहस्यमयी चुप्पी और निष्क्रियता के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और वे सरेआम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं।बार-बार आवेदन के बाद भी प्रशासन मौन:आखिर शह किसकी?प्रेसवार्ता में छत्तीसगढ़ डायोसीस बोर्ड के पदाधिकारियों ने सीधे तौर पर जिला प्रशासन और मुंगेली पुलिस की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया। प्रबंधकों ने दस्तावेज़ दिखाते हुए बतायाशिकायतों का अंबार,कार्रवाई शून्य:विद्यालय की वैधानिक प्रभारी प्राचार्य श्रीमती सोफिया जे. हैरिसन और बोर्ड द्वारा मुंगेली सिटी कोतवाली,पुलिस अधीक्षक मुंगेली,जिला कलेक्टर मुंगेली सहित तमाम उच्चाधिकारियों को लगातार विस्तृत लिखित शिकायतें दी गईं।
अनादर और अनदेखी:इन आवेदनों में साफ तौर पर 'आपराधिक अतिक्रमण', 'ताला तोड़कर जबरन घुसने', 'सरकारी आदेशों की अवहेलना' और 'धोखाधड़ी' जैसे संगीन अपराधों का उल्लेख किया गया था,जो सीधे तौर पर संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं।FIR दर्ज करने से बचती रही पुलिस:इतने संवेदनशील मामले में,जहाँ सैकड़ों बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है, पुलिस प्रशासन तत्काल FIR दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई करने के बजाय लगातार मामले को टालता रहा। प्रशासन की इस ढीली और उदासीन कार्यप्रणाली के कारण ही अवैध कब्जाधारी आज भी निर्भीक होकर स्कूल परिसर के भीतर समानांतर सत्ता चला रहे हैं।सिलसिलेवार घटनाक्रम:कैसे रची गई कब्ज़े की साजिश?सर्किट हाउस में पत्रकारों के सामने बोर्ड ने पूरे मामले का प्रामाणिक घटनाक्रम पेश किया साथ ही सीसीटीवी फुटेज भी जारी किया29 सितंबर 2025:रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटी के एक आदेश की जानबूझकर भ्रामक और गलत व्याख्या की गई। इसके आड़ में कुछ बाहरी और असंबद्ध व्यक्तियों द्वारा CDBE संस्था के अंतर्गत संचालित स्कूलों पर अवैध नियंत्रण का कुत्सित प्रयास शुरू हुआ।
08 अक्टूबर 2025:स्कूल में जब नियमित कक्षाएं चल रही थीं और बच्चे पढ़ रहे थे,ठीक उसी समय संदीप लाल,एम. प्रसाद,आई.पी. यादव,शैलेन्द्र तितुस और उनके गुंडे स्कूल परिसर में घुसे। उन्होंने प्रभारी प्राचार्य के कक्ष का ताला तोड़कर जबरन कब्ज़ा कर लिया। स्कूल के भीतर हुई इस गुंडागर्दी और हुड़दंग से बच्चे सहम गए और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा आघात लगा।01 दिसंबर 2025:इस अराजकता को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन के निर्देश पर रायपुर कलेक्टर को छत्तीसगढ़ डायोसीस बोर्ड ऑफ़ एजुकेशन (CDBE) संस्था का 'प्रशासक' नियुक्त किया गया।प्रबंधकों ने वीडियो क्लिप दिखाते हुए बताया कि जब 25 जनवरी 2026 जब प्रशासनिक आदेशानुसार विद्यालय का कार्यभार पुनः ग्रहण करने हेतु मुंगेली पहुंचा गया,तो इन कब्जाधारियों ने विद्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया। इस दौरान अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। यहाँ तक कि आरोपी संदीप लाल ने खुलेआम चुनौती देते हुए कहा"मैं किसी कलेक्टर को नहीं मानता!"यह सीधे तौर पर प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना और कानून व्यवस्था को खुली चुनौती थी,लेकिन फिर भी प्रशासन मौन रहा।27 मार्च 2026:प्रशासक की देखरेख और शासकीय निगरानी में संस्था की उपविधियों के तहत विधिवत व लोकतांत्रिक चुनाव संपन्न कराए गए,जिसमें Rt. Rev. सुषमा कुमार को अध्यक्ष और नितिन लॉरेंस को उपाध्यक्ष चुना गया।बच्चों के भविष्य से खिलवाड़:मार्कशीट पर फर्जी हस्ताक्षरचुनाव के बाद कानूनन स्कूल का नियंत्रण बोर्ड के पास होना चाहिए था,लेकिन वर्तमान में संदीप लाल और संगीता लाल द्वारा विद्यालय पर अवैध कब्ज़ा बरकरार रखा गया है।सबसे गंभीर बात यह है कि संगीता लाल विद्यालय की वैधानिक प्राचार्य नहीं हैं,इसके बावजूद वे स्वयं को "स्वयंभू प्राचार्य" घोषित कर स्कूल का संचालन कर रही हैं। वे बच्चों की मार्कशीट और प्रमाणपत्रों पर "प्राचार्य" के रूप में फर्जी हस्ताक्षर कर रही हैं। यह सीधे तौर पर 'पद का मिथ्या प्रतिरूपण' और एक गंभीर प्रशासनिक धोखाधड़ी है,जिससे भविष्य में इन बच्चों की डिग्रियां और मार्कशीट अवैध घोषित हो सकती हैं।करोड़ों की अवैध वसूली और वित्तीय अराजकताबोर्ड ने प्रेस के सामने विद्यालय के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन को लेकर भी चौंकाने वाले खुलासे किएअवैध कैश कलेक्शन:13 अक्टूबर 2025 के बाद से विद्यालय के आधिकारिक बैंक खाते में एक भी रुपया जमा नहीं किया गया है। इसके बावजूद पालकों से अवैध रूप से फीस वसूली जारी है। यह पैसा कहाँ जा रहा है,इसका कोई हिसाब नहीं है।
नियमों की धज्जियां:संस्था के नाम पर चल रहे 'Force Traveller' वाहन की EMI कई महीनों से लंबित है। डीजल और पेट्रोल पंपों का भुगतान नहीं किया गया है।कर्मचारियों का शोषण:स्कूल के वफादार कर्मचारियों को बैंक के बजाय नकद (Cash) वेतन देकर वित्तीय नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, तथा कर्मचारियों का PF (भविष्य निधि) और ESIC का पैसा भी जमा नहीं किया जा रहा है। बोर्ड ने इस पूरे लेनदेन की स्वतंत्र ऑडिट और उच्च स्तरीय वित्तीय जांच की मांग की है।मुंगेली आओगे तो हाथ-पैर काट देंगे":जान से मारने की धमकीप्रेसवार्ता में यह भी बताया गया कि आरोपी सिर्फ आर्थिक और प्रशासनिक अपराध तक ही सीमित नहीं हैं,बल्कि वे पूरी तरह आपराधिक गुंडागर्दी पर उतर आए हैं। विद्यालय की वैध प्रभारी प्राचार्य श्रीमती सोफिया जे. हैरिसन को मुंगेली आने पर हाथ-पैर काट देने और जान से मारने की सीधी धमकियां दी जा रही हैं। इसके अलावा,प्रशासन द्वारा जिन दागी या निलंबित कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया था उन्हें जबरन बहाल कर विद्यालय के भीतर भय और आतंक का माहौल निर्मित किया जा रहा है।छत्तीसगढ़ डायोसीस बोर्ड की अंतिम चेतावनी और मांगप्रेसवार्ता के अंत में द राइट रेंव. सुषमा कुमार,अध्यक्ष,CDBE और नितिन लॉरेंस,उपाध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में कहा कि वे इस अन्याय के खिलाफ पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैंतत्काल FIR और गिरफ्तारी:शासकीय आदेशों की अवहेलना करने,जालसाजी करने,फर्जी हस्ताक्षर करने और जान से मारने की धमकी देने वाले संदीप लाल,संगीता लाल और उनके सहयोगियों पर तुरंत विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।पुलिस सुरक्षा और नियंत्रण:विद्यालय परिसर से अवैध कब्जाधारियों को बाहर निकाल कर वैध प्रभारी प्राचार्य श्रीमती सोफिया जे. हैरिसन को पुलिस संरक्षण में कार्यभार सुचारू रूप से चलाने की व्यवस्था दी जाए।उच्च स्तरीय जांच: बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए जाली लेटरहेड,फर्जी मार्कशीट और अवैध रूप से वसूली गई फीस की उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए।बोर्ड ने साफ कहा कि यदि बार-बार आवेदन देने के बाद भी मुंगेली जिला और पुलिस प्रशासन इसी तरह मूकदर्शक बना रहा,तो संस्था बच्चों के अधिकारों और कानून की रक्षा के लिए सीधे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी,जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी। वही अगर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के द्वारा इस मामले में कार्यवाही नहीं करते हैं तो हमारे द्वारा हजारों लोगों के साथ स्कूल के सामने विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल किया जाएगा जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी