मेड़ता रोड स्टेशन यार्ड में एलसी-105 पर सफलतापूर्वक हुई बॉक्स पुशिंग, अब फाटक पर जाम से मिलेगी राहत

जोधपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल में रेल संचालन को और अधिक सुरक्षित व सुगम बनाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। मेड़ता रोड-जोधपुर सेक्शन स्थित समपार फाटक संख्या-105 पर आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक ?बॉक्स पुशिंग? का कार्य सोमवार को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह कार्य मंडल की एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग सफलता मानी जा रही है।

मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि एलसी-105 पर 5 मीटर 6 मीटर आकार तथा 8.25 मीटर बैरल लंबाई वाले दो सेगमेंट का आरसीसी बॉक्स रेलवे ट्रैक के नीचे सफलतापूर्वक पुश किया गया है। इसके साथ ही अप लाइन का गर्डर रविवार को सुरक्षित रूप से डि-लॉन्च कर दिया गया है, जबकि डाउन लाइन गर्डर की डि-लॉन्चिंग मंगलवार को प्रस्तावित है।

रेलवे प्रशासन ने बताया कि इस कार्य के दौरान सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रखा गया। लॉन्चिंग से पूर्व पीसीई की स्वीकृति प्राप्त की गई थी। मौके पर सेल्फ कॉम्पैक्टिंग बैकफिल सामग्री और बैलास्ट पहले से उपलब्ध कराया गया। गर्डर डि-लॉन्चिंग से पहले बॉक्स के किनारों पर सुरक्षा हेतु सैंड बैग लगाए गए और एक जॉइंट को कंक्रीट कैनवास एवं एमएस शीट से सील किया गया। बैकफिलिंग के दौरान बेहतर मजबूती के लिए परत-दर-परत पानी का छिड़काव कर कम्पैक्शन सुनिश्चित किया गया।

डीआरएम अनुराग त्रिपाठी ने इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने पर परिचालन, सिग्नल, विद्युत एवं इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के समन्वय की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।

क्या होती है बॉक्स पुशिंग तकनीक?

वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (पूर्व) श्रीचंद पूनिया ने बताया कि बॉक्स पुशिंग रेलवे इंजीनियरिंग की एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें पहले से तैयार विशाल आरसीसी बॉक्स को हाइड्रोलिक जैक की मदद से रेलवे ट्रैक के नीचे धीरे-धीरे धकेला जाता है। इस दौरान बॉक्स के आगे की मिट्टी को लगातार हटाया जाता है और संरचना धीरे-धीरे ट्रैक के नीचे स्थापित होती जाती है। इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें अधिकांश समय रेल यातायात पूरी तरह बंद नहीं करना पड़ता।

एलसी-105 पर क्या बदलेगा?

रेलवे द्वारा एलसी-105 पर रेलवे लाइन के नीचे बड़े आकार का कंक्रीट बॉक्स स्थापित कर दिया गया है। भविष्य में यहां अंडरपास विकसित होने के बाद समपार फाटक पर लगने वाले लंबे जाम से राहत मिलेगी और दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह कार्य यात्री सुरक्षा के साथ-साथ सड़क और रेल यातायात को सुचारू बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।