मध्य रेल के रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ ने एक बार फिर अपनी सतर्कता, बहादुरी और मानवीय सेवा का शानदार उदाहरण पेश किया है।

मध्य रेल के रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ ने एक बार फिर अपनी सतर्कता, बहादुरी और मानवीय सेवा का शानदार उदाहरण पेश किया है।

01 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 के बीच आरपीएफ मध्य रेल ने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए कई अहम अभियानों के जरिए सैकड़ों लोगों की मदद की है।सबसे पहले बात ?ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते? की?इस अभियान के तहत रेलवे परिसरों में पाए गए खोए हुए, लापता, घर से भागे हुए या बेसहारा बच्चों को सुरक्षित बचाया गया। इस दौरान कुल 499 बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें 331 लड़के और 168 लड़कियां शामिल हैं। इन बच्चों को या तो उनके परिवारों से मिलाया गया या फिर बाल कल्याण समितियों और एनजीओ को सौंपा गया।

मंडलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो

भुसावल से 159, पुणे से 121, मुंबई से 113, नागपुर से 93 और सोलापुर से 13 बच्चों को सुरक्षित बचाया गया।

वहीं ?ऑपरेशन डिग्निटी? के तहत जरूरतमंद और कमजोर वयस्कों की मदद की गई। इस दौरान कुल 85 लोगों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें 38 पुरुष और 47 महिलाएं शामिल हैं।

इनमें से कई लोग लापता थे, कुछ पीछे छूट गए थे, तो कुछ को चिकित्सा या मानसिक सहायता की जरूरत थी। आरपीएफ ने इन्हें समय पर सहायता और सुरक्षित देखभाल उपलब्ध कराई।

अब बात ?ऑपरेशन जीवन रक्षा? की?इस अभियान के तहत आरपीएफ जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रियों की जान बचाई।

चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने के दौरान हादसे का शिकार होने वाले 25 यात्रियों की जान बचाई गई, जिनमें 20 पुरुष और 5 महिलाएं शामिल हैं।

मंडलवार देखें तो भुसावल में 11, मुंबई में 6, पुणे में 4, सोलापुर में 2 और नागपुर में 2 यात्रियों को सुरक्षित बचाया गया।

ये सभी आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि आरपीएफ केवल एक सुरक्षा बल नहीं, बल्कि मानवता की सेवा में समर्पित एक संवेदनशील संस्था भी है।

मध्य रेल ने यात्रियों से अपील की है कि वे चलती ट्रेनों में चढ़ने या उतरने से बचें, अपने सामान की सुरक्षा का ध्यान रखें और यदि किसी भी प्रकार का खोया हुआ, बेसहारा या संकटग्रस्त व्यक्ति रेलवे परिसर में दिखाई दे तो तुरंत आरपीएफ या रेलवे स्टाफ को सूचित करें, या हेल्पलाइन नंबर 139 पर संपर्क करें।