शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय केराडीह में 12 शिक्षक तैनात, समय पर एक भी शिक्षक नहीं पहुंचे स्कूल 7:45 पर पहुंचे एक अध्यापक 

शिक्षा व्यवस्था पर सवाल: पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय केराडीह में 12 शिक्षक तैनात, समय पर एक भी शिक्षक नहीं पहुंचे स्कूल 7:45 पर पहुंचे एक अध्यापक


चन्दौली। चकिया क्षेत्र के पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय केराडीह में शिक्षकों की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, विद्यालय में कुल 12 शिक्षकों की नियुक्ति होने के बावजूद निर्धारित समय पर केवल एक ही शिक्षक उपस्थित मिला, जबकि बाकी शिक्षक अनुपस्थित रहे। इस दौरान विद्यालय परिसर में दर्जनों बच्चे सुबह 7:45 बजे से ही इंतजार करते नजर आए।


ग्रामीणों के मुताबिक, विद्यालय का समय शुरू होने के काफी देर बाद तक भी अधिकतर शिक्षक नहीं पहुंचे, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई। कई अभिभावकों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार द्वारा शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर शिक्षकों की लापरवाही से इन योजनाओं की धज्जियां उड़ रही हैं।


अभिभावक रामलालने बताया, ?हम लोग अपने बच्चों को समय से स्कूल भेजते हैं, लेकिन जब शिक्षक ही समय पर नहीं आते, तो बच्चों का भविष्य कैसे सुधरेगा?? वहीं एक अन्य अभिभावक सीता देवी ने कहा, ?यह रोज की समस्या बन गई है। कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती।?


विद्यालय के एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ?अक्सर हमें स्कूल आकर इंतजार करना पड़ता है। कभी-कभी तो बिना पढ़ाई के ही वापस घर लौटना पड़ता है।? इस तरह की स्थिति से बच्चों का मनोबल भी प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ शिक्षक नियमित रूप से देर से आते हैं या अनुपस्थित रहते हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। इससे शिक्षकों के हौसले बुलंद हैं और वे अपनी जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाह बने हुए हैं।


जब इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में आया है और जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।


स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस प्रकार की लापरवाही पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा। उन्होंने मांग की है कि विद्यालय में नियमित निरीक्षण किया जाए और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं।


यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब तक सरकारी विद्यालयों में इस तरह की अनियमितताएं चलती रहेंगी और जिम्मेदारों पर कब कार्रवाई होगी।