नौगढ़ ब्लॉक बना मनरेगा फर्जीवाड़े का अड्डा? मझगांवा में 700 मजदूर सिर्फ कागजों पर, जमीनी हकीकत ने खोली पोल

नौगढ़ ब्लॉक बना मनरेगा फर्जीवाड़े का अड्डा? मझगांवा में 700 मजदूर सिर्फ कागजों पर, जमीनी हकीकत ने खोली पोल


नौगढ़/चंदौली। जनपद के नौगढ़ ब्लॉक अंतर्गत मझगांवा गांव में मनरेगा योजना के तहत बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये निकाले जा रहे हैं, जबकि धरातल पर काम नाममात्र का भी दिखाई नहीं देता। मामला सामने आने के बाद पूरे ब्लॉक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।


700 मजदूर कागजों में, मौके पर गिने-चुने लोग


ग्रामीणों के अनुसार मझगांवा में लगभग 700 मजदूरों की उपस्थिति मस्टर रोल में दर्ज की जा रही है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। गांव के एक निवासी�बताते हैं, ?हम रोज गांव में रहते हैं, लेकिन इतना बड़ा काम कहीं होता नहीं दिखता। कागजों में सैकड़ों मजदूर दिखाए जाते हैं, जबकि मौके पर 10?15 लोग ही काम करते नजर आते हैं।?


एक ही फोटो से तैयार हो रहा फर्जी मस्टर रोल


सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि एक ही व्यक्ति की फोटो को बार-बार अपलोड कर फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए मस्टर रोल तैयार किया जा रहा है। इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि तकनीकी स्तर पर भी बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा रही है।


मिलीभगत के आरोप, जिम्मेदारों पर उठे सवाल


ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में ब्लॉक स्तर के कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। एपीओ मनरेगा, जेई, बीडीओ और ठेकेदार की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है। कुछ लोगों ने ब्लॉक प्रमुख की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और कहा है कि उनके संरक्षण में यह सब हो रहा है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।


शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं


ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले की जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गांव के एक बुजुर्ग�कहते हैं, ?पहले मनरेगा से गांव में काम होता था, अब यह सिर्फ पैसा निकालने का जरिया बन गया है। अगर निष्पक्ष जांच हो जाए तो बड़ा घोटाला सामने आएगा।?


योजना के उद्देश्य पर खतरा


मनरेगा जैसी योजना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार देना और गांवों का विकास करना है, लेकिन इस तरह के मामलों से योजना की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। यदि फर्जीवाड़ा इसी तरह चलता रहा, तो वास्तविक जरूरतमंदों को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा।


अब प्रशासन की परीक्षा


यह मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे ब्लॉक में व्याप्त संभावित अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण पर क्या कदम उठाता है और क्या वास्तव में दोषियों तक कार्रवाई पहुंचती है या मामला फाइलों में दबकर रह जाता है।

मझगांवा का यह मामला मनरेगा योजना की जमीनी हकीकत को उजागर करता है। जहां एक ओर कागजों में विकास की तस्वीर बनाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर गरीब मजदूर अपने हक से वंचित हैं। अब जरूरी है कि इस पर सख्त और पारदर्शी कार्रवाई हो, ताकि योजना का वास्तविक लाभ सही लोगों तक पहुंच सके।