इसहुल में मनरेगा घोटाले का खुलासा: कागजों पर 76 मजदूर, मौके पर नहीं दिखा काम ग्रामीणों का आरोप—प्रधान, बीडीओ, जेई व ठेकेदार की मिलीभगत से सरकारी धन की बंदरबांट

इसहुल में मनरेगा घोटाले का खुलासा: कागजों पर 76 मजदूर, मौके पर नहीं दिखा काम

ग्रामीणों का आरोप?प्रधान, बीडीओ, जेई व ठेकेदार की मिलीभगत से सरकारी धन की बंदरबांट

चकिया, चंदौली। चकिया ब्लॉक के इसहुल ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली का मामला सामने आया है। रिकॉर्ड में जहां 76 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज दिख रही है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आई। मौके पर या तो मजदूर नदारद मिले या बेहद कम संख्या में कार्य करते दिखाई दिए।

ग्रामीणों का आरोप है कि मस्टरोल में फर्जी तरीके से मजदूरों के नाम दर्ज कर भुगतान निकाल लिया जाता है, जबकि वास्तविक कार्य या तो होता ही नहीं या नाम मात्र का किया जाता है। इससे सरकारी धन का खुला दुरुपयोग हो रहा है।

ग्राम निवासी ने बताया,

?हम रोज़ इसी रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन कहीं कोई काम चलता नहीं दिखता। फिर भी कागजों में दर्ज है कि दर्जनों मजदूर काम कर रहे हैं। यह सीधा-सीधा घोटाला है।?

वहीं ग्रामीण महिलाने कहा,

?हम लोगों को काम नहीं मिलता, लेकिन मस्टरोल में हमारे नाम चढ़ाकर पैसे निकाल लिए जाते हैं। यह गरीबों के हक पर डाका है।?

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में प्रधान, बीडीओ, जेई और ठेकेदार की मिलीभगत से यह खेल चल रहा है। शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साईं ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि ?अधिकारी हर बार जांच का आश्वासन देते हैं, लेकिन कार्रवाई शून्य रहती है।?

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मनरेगा कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, मस्टरोल का सत्यापन कराया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गरीब मजदूरों का हक सुरक्षित रह सके।