पिहानी ब्लॉक में बेअसर हुई सरकार की स्थानांतरण नीति, 15 सालों से एक ही कुर्सी पर जमे 'अंगद'

पिहानी ब्लॉक में बेअसर हुई सरकार की स्थानांतरण नीति, 15 सालों से एक ही कुर्सी पर जमे 'अंगद'

#हरदोई (पिहानी)
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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार पर "जीरो टॉलरेंस" और सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाने के लिए सख्त स्थानांतरण नीति (Transfer Policy) का दावा करती है। लेकिन जनपद हरदोई के पिहानी ब्लॉक में यह दावे कागजी शेर साबित हो रहे हैं। यहाँ एक तकनीकी सहायक ने अपनी जड़ें इस कदर जमा ली हैं कि सरकार के नियम और उच्चाधिकारियों के आदेश भी उन्हें हिलाने में नाकाम हैं।

15 साल, एक पद: नियमों की उड़ी धज्जियाँ

​मामला पिहानी ब्लॉक का है, जहाँ तकनीकी सहायक सिद्धेश्वर_द्विवेदी_ पिछले 15 वर्षों से एक ही पद और एक ही स्थान पर विद्यमान हैं। शासन की नीति स्पष्ट है कि किसी भी पटल या क्षेत्र में तीन वर्ष से अधिक समय होने पर स्थानांतरण अनिवार्य है, ताकि कार्यप्रणाली में निष्पक्षता बनी रहे। लेकिन द्विवेदी के मामले में यह नियम जैसे ब्लॉक की सीमाओं के बाहर ही दम तोड़ देते हैं।

सत्ता का संरक्षण या 'लिफाफा' संस्कृति?

​क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर वो कौन सी अदृश्य शक्ति है जो सिद्धेश्वर द्विवेदी को हर बार स्थानांतरण की जद से बचा लेती है?

👉​पहला सवाल: क्या जिलाधिकारी महोदय की नजर इस गंभीर लापरवाही पर नहीं पड़ रही?
👉​दूसरा सवाल: क्या विभाग के बड़े अधिकारियों ने इन्हें अभयदान दे रखा है?
👉​तीसरा और सबसे गंभीर सवाल: क्या यह "सत्ता के संरक्षण" का मामला है या फिर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों तक पहुँचने वाले 'खास लिफाफों' का कमाल, जिसकी वजह से सरकार की नीति को सरेआम पलीता लगाया जा रहा है?

भ्रष्टाचार और सिंडिकेट की आशंका

​विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि जब कोई कर्मचारी एक ही स्थान पर एक दशक से ज्यादा समय तक टिक जाता है, तो वहां पारदर्शिता खत्म हो जाती है और एक "स्थानीय सिंडिकेट" का जन्म होता है। विकास कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी धन के बंदरबांट की आशंकाएं भी ऐसे ही हालातों में प्रबल होती हैं।

प्रशासन की चुप्पी पर उठते सवाल

​पिहानी ब्लॉक के इस चर्चित प्रकरण ने जिले के प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जहाँ एक तरफ छोटे कर्मचारियों को नियम का पाठ पढ़ाया जाता है, वहीं सिद्धेश्वर द्विवेदी जैसे रसूखदारों का 15 साल तक एक ही जगह टिके रहना व्यवस्था की पोल खोलता है।

​अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद क्या जिला प्रशासन और शासन के जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद से जागते हैं, या फिर पिहानी ब्लॉक में 'अंगद के पैर' की तरह जमे इस तकनीकी सहायक का रसूख इसी तरह कायम रहता है।

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