मेहंदीपुर बालाजी जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए विकसित हुआ बांदीकुई स्टेशन अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 24.27 करोड़ से हो रहा स्टेशन का पुनर्विकास

मेहंदीपुर बालाजी जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए विकसित हुआ बांदीकुई स्टेशन

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 24.27 करोड़ से हो रहा स्टेशन का पुनर्विकास

दौसा/बांदीकुई। राजस्थान के दौसा जिले में स्थित बांदीकुई रेलवे स्टेशन अब मेहंदीपुर बालाजी मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक आधुनिक आवागमन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बांदीकुई स्टेशन का व्यापक स्तर पर पुनर्विकास किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

बांदीकुई एक ऐतिहासिक रेल नगरी है जिसकी स्थापना वर्ष 1874 में हुई थी। यह शहर विश्वप्रसिद्ध मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, 9वीं शताब्दी की चांद बावड़ी, हर्षत माता मंदिर, ऐतिहासिक सेंट फ्रांसिस रोमन कैथोलिक चर्च और 17वीं शताब्दी के भंडारेज किले जैसे पर्यटन स्थलों के कारण खास पहचान रखता है। साथ ही यह क्षेत्र राजस्थानी कला, संस्कृति, पारंपरिक बाजारों और कृषि व्यापार के लिए भी प्रसिद्ध है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि बांदीकुई स्टेशन उत्तर पश्चिम रेलवे के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण जंक्शनों में से एक है। यह जयपुर, दिल्ली और राजस्थान के आंतरिक क्षेत्रों का प्रमुख प्रवेश द्वार भी माना जाता है। स्टेशन पर प्रतिदिन करीब 104 ट्रेनों का ठहराव होता है और लगभग 16 हजार यात्री रोजाना यहां से यात्रा करते हैं।

उन्होंने बताया कि स्टेशन के पुनर्विकास के लिए 24 करोड़ 27 लाख रुपये की लागत से मास्टर प्लान तैयार किया गया है, जिसे चरणबद्ध तरीके से लागू करते हुए कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। पुनर्विकसित स्टेशन पर नई यात्री सुविधाओं के साथ-साथ मौजूदा सुविधाओं का उन्नयन भी किया जा रहा है।

पुनर्विकास कार्यों के अंतर्गत स्टेशन पर चौड़े और रोशनीयुक्त प्रवेश-निकास द्वार, बेहतर सर्कुलेटिंग एरिया, चौड़ी सड़कें, पैदल यात्रियों और वाहनों के लिए अलग मार्ग, ड्रॉप और पिकअप की सुविधा तथा दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए अलग पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा जल निकासी प्रणाली में सुधार, यात्री सूचना प्रणाली को आधुनिक बनाना, ट्रेन डिस्प्ले बोर्ड और कोच इंडिकेशन डिस्प्ले की सुविधा भी विकसित की जा रही है।

स्टेशन पर जीपीएस घड़ियां, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए एलईडी लाइटिंग, वातानुकूलित प्रतीक्षालय, टिकट वेंडिंग मशीन, फूड प्लाजा, शीतल एवं सामान्य पेयजल बूथ, बेहतर प्लेटफार्म शेल्टर और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जा रही है।

दिव्यांगजनों के लिए स्टेशन को अधिक अनुकूल बनाने के लिए रैंप, आरक्षित पार्किंग, कम ऊंचाई वाले काउंटर, दिव्यांग अनुकूल शौचालय, सहायता बूथ, स्पर्श मार्ग, ब्रेल लिपि में साइनेज, रैंप के साथ एफओबी तथा बेहतर उद्घोषणा प्रणाली जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

स्टेशन पर शहर के दोनों छोरों को जोड़ने के लिए 12 मीटर चौड़े फुट ओवर ब्रिज का प्रावधान किया गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए 2 लिफ्ट लगाने का कार्य भी प्रगति पर है। सुरक्षा के लिए सहायता बूथ, सीसीटीवी कैमरों का अपग्रेडेशन और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली का विस्तार भी किया जा रहा है।

स्टेशन परिसर में हरित क्षेत्र विकसित कर कम पानी वाली प्रजातियों के पौधे लगाए जा रहे हैं तथा स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए देशी प्रजातियों का रोपण किया जा रहा है। इसके साथ ही स्टेशन की दीवारों और खुले स्थानों पर मिट्टी के भित्ति चित्र, पेंटिंग और स्थानीय शिल्प के माध्यम से राजस्थान की कला और संस्कृति को भी दर्शाया जाएगा।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार बांदीकुई स्टेशन का पुनर्विकास कार्य अंतिम चरण में है। इसका उद्देश्य स्टेशन को आधुनिक बनाना और यात्रियों की सुविधाओं का विस्तार करना है। इससे न केवल स्थानीय यात्रियों को लाभ मिलेगा, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।