हरदोई में अपराध रोकने में नाकाम लोनार SHO राकेश यादव की तानाशाही, पत्रकारों को ‘अज्ञानी’ बताकर ग्रुप से हटाया, विवाद बढ़ने के बाद खुद ग्रुप छोड़ा, निजी युवक को बनाया एडमिन

हरदोई। जनपद के लोनार कोतवाली क्षेत्र में पुलिस और पत्रकारों के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मामला डिजिटल वालंटियर (DV) व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ा है, जहां SHO द्वारा पत्रकारों को हटाने और एक निजी युवक को एडमिन बनाए जाने के बाद बवाल खड़ा हो गया है।
बताया जा रहा है कि SHO राकेश यादव ने अचानक ग्रुप से एक दर्जन से अधिक पत्रकारों को बाहर कर दिया। इतना ही नहीं, कथित तौर पर उन्होंने खुद को ?ज्ञानी? और पत्रकारों को ?अज्ञानी? तक कह दिया, जिससे मामला और गरमा गया। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और पत्रकारों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
विवाद तब और बढ़ गया जब SHO ने KD YADAV नाम के एक निजी युवक को ग्रुप का एडमिन बना दिया। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि एक आधिकारिक पुलिस ग्रुप में किसी प्राइवेट व्यक्ति को एडमिन बनाने का अधिकार कैसे दिया गया।
मामले की जड़ में वह घटना बताई जा रही है, जिसमें बावन बस स्टॉप के पास झाड़ियों में एक युवती खून से लथपथ हालत में मिली थी। पत्रकारों ने इस खबर को दुष्कर्म की आशंका के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसी से नाराज होकर SHO ने यह कार्रवाई की।
आरोप यह भी है कि इंस्पेक्टर राकेश यादव पत्रकारों पर दबाव बनाना चाहते हैं कि केवल ?कानों को अच्छी लगने वाली? खबरें ही चलाई जाएं। जबकि DV ग्रुप का उद्देश्य सरकार और डीजीपी के निर्देश पर क्षेत्रीय सूचनाओं का आदान-प्रदान और मित्र पुलिसिंग को मजबूत करना था।
पहले भी सांडी में तैनाती के दौरान उनका पत्रकारों से विवाद चर्चा में रहा है। जिसके बाद काफी हो हल्ला मचा था लेकिन कार्रवाई के नाम पर लोनार थाने में तबादला हुआ। इसके बाद इंस्पेक्टर राकेश यादव के हौसले बुलंद हो गए। और फिर उसने एक के बाद एक पत्रकारों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया। लोनार थाना क्षेत्र में ही एक पत्रकार रामजी शर्मा को पहले गाली-गलौज किया। जब उसने शिकायत की तो उसके गांव से दो प्रार्थना पत्र लेकर फर्जी तरीके से मुकदमा दर्ज कर दिया। जिसमें पीड़ित पत्रकार ने एसपी अशोक कुमार मीणा को तीन बार शिकायतीपत्र दिया। लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इसे उच्चाधिकारियों का वरदहस्त प्राप्त है। तभी इन्हें सच दिखाने वाले पत्रकार ही सबसे बड़े अपराधी लग रहे है, जब ऐसा ही रहेगा तो पत्रकार अपना काम निष्पक्ष तरीके से कैसे कर पाएंगे। ये सवाल उठ रहा है। साथ इनकी कार्यशैली को देखकर अब मांग उठ रही है कि इन्हें प्रमोट कर कोई उच्च पद दिया जाए। जिससे ये पत्रकार और सम्भ्रांत नागरिकों का बेहतर ढंग से शोषण कर पाए। इस पूरे घटनाक्रम ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल, पूरे मामले में कार्रवाई को लेकर सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हुई हैं।