चकिया ब्लॉक में मनरेगा घोटाले का बड़ा खुलासा: 427 फर्जी मजदूरों के नाम पर लाखों की निकासी, फोटो पुरुष का–हाजिरी महिला के नाम!

चकिया ब्लॉक में मनरेगा घोटाले का बड़ा खुलासा: 427 फर्जी मजदूरों के नाम पर लाखों की निकासी, फोटो पुरुष का?हाजिरी महिला के नाम!


चकिया, चंदौली। जनपद के चकिया विकासखंड में मनरेगा योजना के तहत बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि जिला पंचायत के अंतर्गत कराए जा रहे कार्यों में ठेकेदार और संबंधित जिम्मेदारों की मिलीभगत से सैकड़ों फर्जी मजदूरों के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान किया जा रहा है।


सूत्रों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, जीएस, इसहुल, तियरी और पचवनियां गांवों में चल रहे कार्यों में कुल 427 मजदूर केवल कागजों पर कार्यरत दिखाए गए हैं, जबकि मौके पर इतनी संख्या में मजदूर मौजूद ही नहीं होते। इससे साफ संकेत मिलता है कि मनरेगा योजना को जमकर लूटा जा रहा है।


फर्जी हाजिरी का नया खेल


इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुरुष मजदूरों की फोटो खींचकर महिला मजदूरों के नाम पर हाजिरी लगाई जा रही है। यानी, सिस्टम को धोखा देने के लिए डिजिटल हाजिरी में भी हेराफेरी की जा रही है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि तकनीकी निगरानी के बावजूद भ्रष्टाचार के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं।


ग्राउंड पर सच्चाई कुछ और


ग्रामीणों का कहना है कि जहां कागजों में सैकड़ों मजदूर काम करते दिखाए जा रहे हैं, वहीं वास्तविकता में कार्यस्थल पर बहुत कम मजदूर ही नजर आते हैं। इससे न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि जरूरतमंद असली मजदूरों को रोजगार से भी वंचित किया जा रहा है।


एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,


"हम लोग काम के लिए जाते हैं तो कहा जाता है कि मजदूर पहले से लगे हैं, लेकिन मौके पर कोई काम करता नहीं दिखता। पूरा खेल कागजों में चल रहा है।"


ठेकेदारी सिस्टम पर सवाल


मनरेगा योजना में ठेकेदारी व्यवस्था प्रतिबंधित होने के बावजूद, आरोप है कि जिला पंचायत के कार्यों में ठेकेदारों की सीधी भूमिका है। यही ठेकेदार फर्जी मस्टर रोल तैयार कर, अधिकारियों से मिलीभगत कर सरकारी धन की निकासी करा रहे हैं।


जिम्मेदारों की चुप्पी


इस गंभीर मामले पर ब्लॉक स्तर के अधिकारी और मनरेगा विभाग के जिम्मेदार अब तक चुप्पी साधे हुए हैं। बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होना, पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।


जांच की उठी मांग


ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, तो कई बड़े अधिकारी और ठेकेदार इस घोटाले में फंस सकते हैं।


सरकार जहां मनरेगा योजना को गरीबों के रोजगार का सबसे बड़ा सहारा बताती है, वहीं चकिया ब्लॉक में सामने आया यह मामला बताता है कि किस तरह भ्रष्टाचार ने इस योजना की मूल भावना को ही खोखला कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।