चकिया के प्राथमिक विद्यालय इसहुल में बड़ा खुलासा: शिक्षक नदारद, रजिस्टर में फर्जी हाजिरी, खंड शिक्षा अधिकारी अजीत पाल चकिया बोले होगी कार्यवाही

चकिया के प्राथमिक विद्यालय इसहुल में बड़ा खुलासा: शिक्षक नदारद, रजिस्टर में फर्जी हाजिरी, खंड शिक्षा अधिकारी अजीत पाल चकिया बोले होगी कार्यवाही

चकिया, चंदौली। जनपद के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था लगातार पटरी से उतरती नजर आ रही है। ताजा मामला चकिया ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय इसहुल से सामने आया है, जहां शिक्षकों की लापरवाही और फर्जीवाड़े ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


6 शिक्षकों का स्टाफ, मौके पर सिर्फ 1


जानकारी के अनुसार, विद्यालय में कुल 6 शिक्षक तैनात हैं, लेकिन निरीक्षण के दौरान मौके पर केवल एक ही शिक्षक उपस्थित मिला। बाकी शिक्षक अनुपस्थित पाए गए, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित होती दिखी।
रजिस्टर में 3 शिक्षकों की लगी हाजिरी
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि विद्यालय के उपस्थिति रजिस्टर में तीन शिक्षकों की हाजिरी दर्ज पाई गई, जबकि वे मौके पर मौजूद ही नहीं थे। इससे साफ जाहिर होता है कि बिना विद्यालय आए ही हाजिरी दर्ज की जा रही है।

बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसके आदेश पर यह फर्जी हाजिरी लगाई जा रही है?


बच्चों का भविष्य दांव पर


ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही के चलते बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। शिक्षक न होने के कारण बच्चों को उचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है, जिससे उनका भविष्य अंधकार में जाता दिख रहा है।


खंड शिक्षा अधिकारी की भूमिका पर सवाल


मामले को लेकर जब खंड शिक्षा अधिकारी से संपर्क किया गया, तो उन्होंने हमेशा की तरह आश्वासन देकर पल्ला झाड़ लिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, जिससे शिक्षकों के हौसले बुलंद हैं।


हालांकि, इस बार भी खंड शिक्षा अधिकारी ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस बार वास्तव में कोई प्रभावी कदम उठाया जाएगा?


पहले भी उठ चुके हैं सवाल


ग्रामीणों का कहना है कि जिले के कई सरकारी विद्यालयों में ऐसी अनियमितताएं पहले भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है।


जांच और सख्त कार्रवाई की मांग


अभिभावकों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।

यह मामला एक बार फिर सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर कब और कैसी कार्रवाई करता है।