दैनिक जीवन की समस्याओं के प्रबंधन में संज्ञानात्मक चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता :- डॉ जितेन्द्र कुमार उपाध्याय 

अखण्डनगर, सुल्तानपुर : श्री विश्वनाथ पीजी कॉलेज, कलांन सुल्तानपुर व संत तुलसीदास पीजी कॉलेज कादीपुर सुल्तानपुर के मनोविज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में "दैनिक जीवन की समस्याओं के प्रबन्धन में संज्ञानात्मक चिकित्सा पद्धति की उपयोगिता" शीर्षक पर आयोजित परिचर्चा में संत तुलसीदास पीजी कॉलेज कादीपुर सुल्तानपुर के मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ जितेन्द्र कुमार उपाध्याय ने छात्र छात्राओ को सम्बोधित करते हुए कहा कि : जीवन में हर व्यक्ति को छोटी-बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है?शैक्षिक चिन्ता, भविष्य की अनिश्चितता, कार्यस्थल पर तनाव, पारिवारिक झगड़े, आर्थिक चिंता, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ, या फिर असफलता का डर। ये समस्याएँ न केवल भावनाओं को प्रभावित करती हैं, बल्कि हमारे व्यवहार और शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती हैं। संज्ञानात्मक चिकित्सा पद्धति, इन समस्याओं के प्रबंधन में एक अत्यंत प्रभावी और वैज्ञानिक उपकरण सिद्ध हुई है। यह पद्धति हमें सिखाती है कि हमारी समस्याएँ मुख्य रूप से हमारी सोंच से उत्पन्न होती हैं, न कि केवल बाहरी घटनाओं से। यदि हम अपनी नकारात्मक सोच को पहचानकर उसे सकारात्मक और यथार्थपूर्ण बनाएँ, तो दैनिक जीवन की अधिकांश कठिनाइयाँ स्वयं ही कम हो जाती हैं। संज्ञानात्मक चिकित्सा का विकास 1960 के दशक में अमेरिकी मनोचिकित्सक डॉ. आर एन बेक ने किया था। यह संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी का मूल आधार है। इसका मूल सिद्धांत यह है कि हमारी भावनाएँ और व्यवहार हमारी सोच पर निर्भर करते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति सोचता है ?मैं हमेशा असफल रहता हूँ?, तो वह उदास और निष्क्रिय हो जाएगा। चिकित्सा में हम इस ?संज्ञानात्मक विकृति को चुनौती देते हैं और उसे तथ्यों पर आधारित नई सोंच से बदलते हैं। यह चिकित्सा अल्पकालिक होती है व्यावहारिक है और दवाओं की बजाय स्वयं-प्रबंधन पर ज़ोर देती है। इसमें रोगी को ?होमवर्क? दिया जाता है?जैसे विचार-डायरी लिखना, व्यवहार प्रयोग करना आदि। दैनिक जीवन की प्रमुख समस्याओं में संज्ञानात्मक चिकित्सा लाभकारी साबित होती है। जैसे-तनाव व परीक्षा का डर या भविष्य की चिंता के प्रबन्धन में इस चिकित्सा पद्धति की महत्वपूर्ण भूमिका है। संज्ञानात्मक चिकित्सा ?कैटास्ट्रोफाइजिंग? (सब कुछ सबसे बुरा होगा सोचना) जैसी विकृतियों को रोकती है। रोगी सीखता है कि ?अगर यह काम नहीं हुआ तो क्या वाकई दुनिया खत्म हो जाएगी???और यथार्थवादी विकल्प सोचता है। परिणामस्वरूप चिंता का स्तर 50-70% तक कम हो जाता है। क्रोध और रिश्तों की समस्याएँ यथा- पति-पत्नी के बीच झगड़े या पड़ोसियों से विवाद। यहाँ ?माइंड रीडिंग? (दूसरे के मन की बात अनुमान लगाना) विकृति आम है। ऐसे स्थिति में दूसरे व्यक्ति का व्यवहार हमारी धारणा पर आधारित नहीं, बल्कि उसके अपने कारणों पर है। इससे क्रोध कम होता है और संवाद बेहतर बनता है। अवसाद और कम आत्मसम्मान की स्थिति में जैसे ?मैं बेकार हूँ? जैसी सोच की स्थिति में संज्ञानात्मक चिकित्सा ?ऑल-ऑर-नथिंग थिंकिंग? (सब कुछ काला या सफेद) को तोड़ती है। छोटी-छोटी सफलताओं को रिकॉर्ड करने और ?एविडेंस फॉर एंड एगेंस्ट? विधि से नई सोच विकसित करने से आत्मसम्मान बढ़ता है। स्वास्थ्य और आदतों के प्रबंधन में मोटापा, धूम्रपान छोड़ना या अनिद्रा जैसी समस्याएं शामिल हैं। ?मैं कभी नहीं बदल सकता? जैसी सोंच की स्थिति में छोटे-छोटे व्यवहार परिवर्तन किए जाते हैं।आर्थिक और करियर संबंधी समस्याओं जैसे नौकरी छूटने का डर या निवेश की चिंता की स्थिति में संज्ञानात्मक चिकित्सा ?फोर्ट्यून टेलिंग? (बिना आधार पर भविष्यवाणी) को रोककर समस्या-समाधान कौशल का विकास करती है। कुछ व्यावहारिक तकनीकें भी है जो दैनिक जीवन में आने वाली समस्याओं के समाधान में काम आती हैं, जैसे विचार-रिपोर्ट व ग्रेडेड टास्क असाइनमेंट तैयार करना, समस्या को छोटे छोटे चरणों में विभक्त करना, रिलैक्सेशन और माइंडफुलनेस की स्थिति में सांस पर ध्यान केंद्रित कर नकारात्मक विचारों को रोका जा सकता है। ये तकनीकें घर पर भी अपनाई जा सकती हैं। आज के तकनीकी युग में मोबाइल ऐप्स (जैसे मूडकिट, सीबीटी थांट डायरी और ऑनलाइन कोर्स से भी उक्त समस्याओं का प्रबन्धन किया जा सकता है। वास्तव में संज्ञानात्मक चिकित्सा पद्धति हमें सिखाती है कि हम अपनी सोंच के मालिक हैं। एक बार सोच बदलने की कला सीख ली, तो तनाव, चिंता, क्रोध और निराशा जैसे मेहमान स्वयं दरवाज़ा छोड़कर चले जाते हैं। आज के युग में जब हर कोई ?माइंडफुल? और ?रेजिलिएंट? बनना चाहता है, तो संज्ञानात्मक चिकित्सा सबसे सरल, सस्ता और सबसे प्रभावी हथियार है। परिचर्चा के अवसर पर महाविद्यालय के स्नातक व परास्नातक मनोविज्ञान विषय के छात्र छात्राओं सहित सम्मानित प्राचार्य डॉ मनोज कुमार सिंह, मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ प्रियंका सिंह, वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ राजमणि तिवारी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।