पंचायत सिमकेदा शौचालय घोटाला: अधूरे निर्माण को ‘पूरा’ बताने की कोशिश, वसूली अटकी और जांच पर उठे सवाल

CITIUPDATE NEWS(संतोष सारथी)-कोरबा । स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ग्राम पंचायत सिमकेदा में वर्ष 2016?17 में स्वीकृत शौचालय निर्माण कार्य एक बार फिर विवादों में घिर गया है। अधूरे निर्माण, प्रस्तावित वसूली और कथित फर्जी जांच को लेकर ग्रामीणों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि योजना में हुई अनियमितताओं को दबाने की कोशिश की जा रही है।

जानकारी के अनुसार रामपुर विधानसभा क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता बिहारीलाल सोनी ने शिकायत कर बताया था कि ग्राम पंचायत सिमकेदा में स्वच्छ भारत मिशन के तहत लगभग 418 शौचालये बनना था, जिसमें (एसबीएम) मद से 248 और सीएसआर मद से 170 शौचालयों के निर्माण को स्वीकृति दी गई थी। लेकिन निर्माण एजेंसी और पंचायत के तत्कालीन जिम्मेदार पदाधिकारियों की लापरवाही के कारण बड़ी संख्या में शौचालयों का निर्माण शुरू ही नहीं किया गया, जबकि पंचायत खाते से पूरी राशि आहरित कर ली गई।
शिकायत के बाद वर्ष 2021 में प्रशासन ने जांच दल गठित कर 9 और 10 जून को गांव में घर-घर निरीक्षण कराया था। जांच के दौरान सामने आया कि सीएसआर मद के 127 और एसबीएम मद के 125 शौचालयों का निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ था। यानी कुल 252 शौचालय कागजों में स्वीकृत होने के बावजूद जमीन पर अस्तित्व में नहीं थे। जांच प्रतिवेदन के आधार पर तत्कालीन सरपंच महेश्वरी राठिया और सचिव सुरेश खुंटे के विरुद्ध लगभग 30 लाख 24 हजार रुपये की वसूली प्रस्तावित की गई थी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि अन्य मदों को जोड़ने पर गड़बड़ी की राशि करीब 40 से 42 लाख रुपये तक पहुंचती है। इसके बावजूद वर्षों बाद भी न तो अधूरे शौचालयों का निर्माण पूरा कराया गया और न ही प्रस्तावित वसूली की कार्रवाई आगे बढ़ पाई। इसी बीच जनवरी 2026 में मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए जनपद पंचायत कोरबा ने फिर से जांच दल गठित किया। इस टीम में करारोपण अधिकारी सुरेन्द्र सिंह कंवर, ग्राम पंचायत सिमकेदा के सचिव विनोद राठिया और मेट दीपक कुमार राठिया को शामिल कर पांच दिनों में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन नई जांच को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पूर्व सचिव सुरेश खुंटे और पंचायत से जुड़े कुछ लोगों द्वारा जांच को प्रभावित करने की कोशिश की गई। आरोप है कि अधूरे शौचालयों को रिपोर्ट में पूर्ण दर्शाने का दबाव बनाया गया। इतना ही नहीं, बताया जा रहा है कि जांच रिपोर्ट तैयार होने के बाद भी करीब दो माह बीत जाने के बावजूद इसे जनपद स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों को सौंपा नहीं गया है और इसे अपने पास ही रखा गया है। जब इस संबंध में करारोपण अधिकारी सुरेन्द्र सिंह कंवर से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि पारिवारिक आकस्मिक घटना के कारण वे स्वयं मौके पर जाकर जांच नहीं कर पाए। उन्होंने यह भी कहा कि इसी दौरान सचिव सुरेश खुंटे द्वारा उन्हें अपने घर बुलाकर जांच पूर्ण मानने का दबाव बनाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सिमकेदा पंचायत में आज भी कई शौचालय अधूरे या अस्तित्वहीन हैं, लेकिन कागजों में उन्हें पूर्ण दिखाकर मामले को समाप्त करने की कोशिश हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि पूरे प्रकरण में कुछ लोगों द्वारा मध्यस्थता और दबाव की भूमिका निभाई जा रही है।