कैमेस्ट्री की ए बी सी डी पता नहीं, दे रहे मरीजों को दवा...

कैमेस्ट्री की ए बी सी डी पता नहीं, दे रहे मरीजों को दवा...

मेडिकल पर बिना पर्चे तो झोलाछाप मनमाने तरीके से दे रहे डोज

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भारत देश में दूषित कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर वैसे भी सवाल खड़े कर दिए है। इधर बात करें जनपद हरदोई के मल्लावा थाना क्षेत्र के नशीरपुर चौराहे की जहाँ पर कौशल किशोर मेडिकल की आड मे खुलेआम क्लिनिक चला दे रहे मरीजों को दवा डोज। जिससे मरीजों की जान भी जोखिम में होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिसमें चिकित्सा विभाग की घोर लापरवाही नजर आ रही मेडिकल संचालनकर्ता मरीज के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चंद कदमों पर जिसमें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा न मिलने पर ग्रामीण इन क्लिनिको पर अपना इलाज करवाते हैं । ऐसे में कई बार मरीजों की जान जाने का खतरा भी बना रहता है इसका कारण है झोलाछाप डॉक्टर और बिना डॉक्टर के पर्चे से मिलने वाली दवाईयां।
किसी भी दवा का डोज किस मरीज को कितने मात्रा में दिया जाता है, उसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सक जांच और वजन सहित अन्य मापदंडों के आधार पर तय करते हैं। लेकिन झोलाछाप डॉक्टर और बिना पर्चे के मिलने वाली दवाईयां तो एक जैसी हो सकती है, लेकिन डोज की मात्रा का खेल जीवन खराब कर सकता है। इन दिनों मौसम परिवर्तन होने के साथ सर्दी जुकाम बुखार अन्य बीमारियों की बढ़ोत्तरी हुई है। क्षेत्र में चिकित्सा सुविधा की कमी होने के कारण कई अवैध क्लिनिक खुले हुए हैं। जो मरीज से मन माफिक पैसे वसूल कर उनका इलाज करते हैं।ऐसे में अगर कोई दवाई लेने जाता है या किसी की ज्यादा तबीयत खराब होती है,तो उनको गंभीर बिमारी बताकर मनमाने पैसे लिए जाते है। आरोप है कि कई बार डोज से अधिक दवाई देने पर मरीजों मे साइटडिफेक्ट भी देखने को मिला जिससे उनका स्वास्थ्य ज्यादा खराब होने पर उनको बड़े हॉस्पिटल मे इलाज कराने की सलाह दी जाती। मल्लावा क्षेत्र में इस समय इन अवैध क्लिनिको पर दिनभर मरीजों का तांता लगा रहता है। चिकत्सा विभाग को क्या इसकी कोई जानकारी नही या जानबूझ कर अनजाज बने हुए है ?जो इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नही हो रही। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि बच्च्चों को किसी भी दवा की खुराक केवल उनकी आयु,वजन और चिकित्सीय जांच के आधार पर दी जानी चाहिए। लेकिन जिले में कई झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम दवा और इंजेक्शन दे रहे हैं, जबकि उनके पास किसी भी प्रकार की मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं है। इन डॉक्टरों को यह भी पता नहीं होता कि बच्चे या अन्य मरीजों को कितनी खुराक दी जानी चाहिए, जिससे जानलेवा परिस्थितियां उत्पन्न होने का खतरा बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग और शासन के निर्देशों के बावजूद झोलाछाप डॉक्टरों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या पहले से आम रही है, लेकिन हालात इतने गंभीर हैं कि थाना क्षेत्र मल्लावा में भी कई झोलाछाप डॉक्टर दुकानदारी कर रहे हैं और बच्चों सहित मरीजों का इलाज कर रहे हैं।

गंभीर बीमारी का पता चलता है बाद में...

पीलिया, मलेरिया, डेंगू सहित अन्य गंभीर बीमारियों की शुरुआत सर्दी, खासी, बुखार, पेट की समस्याओं के साथ ही होती है। जहां रोग विशेषज्ञ मरीज को देखते ही जांच रिपोर्ट से पहले ही लक्षणों के आधार पर उपचार शुरु कर देते हैं। वहीं मेडिकल की बिना पर्चे की दवाईयां या झोलाछाप डॉक्टर सिर्फ गंभीर बीमारी के शुरुआती लक्षणों के उपचार से संबंधित दवाईयां दे रहे हैं। जब बीमारी नियंत्रण के बाहर होने लगती है, उसके बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास लोग पहुंचते हैं।

सीधे मेडिकल स्टोर से ले आते हैं दवाइयां

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोगों में भी जागरुकता का अभाव देखा जा रहा है। शिशु रोग विशेषज्ञ जहां वजन और उम्र के अलावा अन्य जांच के आधार पर दवाइयां देते हैं। वहीं वर्तमान में लोग सर्दी,खांसी और बुखार जैसी समस्या के लिए सीधे मेडिकल पहुंच रहे हैं। लक्षणों के आधार पर मेडिकल से बिना डॉक्टर के पर्चे से दवाईयां दी जा रही है। जिससे कहीं न कहीं खतरा मंडरा रहा है।