अहमदाबाद मंडल में दिसंबर 2025 से 19 फरवरी 2026 तक 484 अलार्म चेन पुलिंग की घटनाएँ दर्ज

अहमदाबाद मंडल में दिसंबर 2025 से 19 फरवरी 2026 तक 484 अलार्म चेन पुलिंग की घटनाएँ दर्ज

449 मामलों में केस दर्ज तथा ₹48700 का वसूला जुर्माना

पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल में दिसंबर 2025 से 19 फरवरी 2026 के बीच कुल 484 अलार्म चेन पुलिंग (ACP) की घटनाएँ दर्ज की गईं। इनमें से 449 मामलों में विधिवत केस दर्ज किए गए, जबकि शेष मामलों में प्रारंभिक जांच के उपरांत वैधानिक कारणों से केस दर्ज नहीं किया गया। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए रेलवे सुरक्षा बल (RPF) द्वारा 408 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया तथा ₹48,700 का जुर्माना लगाया गया।

अहमदाबाद मंडल का रेलवे सुरक्षा बल (RPF) यात्रियों की सुरक्षा, रेलवे संपत्ति की रक्षा तथा स्टेशनों पर सुरक्षित वातावरण बनाए रखने के लिए पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य कर रहा है। वर्ष 2026 के दौरान अलार्म चेन पुलिंग की घटनाओं पर कड़ी निगरानी रखते हुए RPF ने सतर्कता, त्वरित कार्रवाई एवं प्रभावी समन्वय के माध्यम से उल्लेखनीय नियंत्रण स्थापित किया है, जिससे ट्रेनों की समयपालनता एवं निर्बाध रेल परिचालन सुनिश्चित हो सके।

स्टेशन स्तर पर अहमदाबाद, साबरमती, मणिनगर, महेसाणा, विरामगाम एवं गांधीधाम में अलार्म चेन पुलिंग की घटनाएँ अपेक्षाकृत अधिक दर्ज की गईं। वहीं सेक्शन स्तर पर गेरतपुर-अहमदाबाद, अहमदाबाद-विरामगाम, उंझा-पालनपुर, सामाख्याली - भुज तथा अहमदाबाद-साबरमती खंडों में अधिक घटनाएँ सामने आईं, जहाँ RPF द्वारा अतिरिक्त निगरानी एवं विशेष अभियान चलाए गए।

अलार्म चेन पुलिंग के प्रमुख कारणों में गलत ट्रेन या कोच में चढ़ जाना, सामान छूट जाना अथवा सहयात्री के छूट जाने जैसी परिस्थितियाँ प्रमुख रूप से पाई गईं। इन कारणों को दृष्टिगत रखते हुए RPF द्वारा यात्रियों को जागरूक करने हेतु नियमित अभियान चलाए जा रहे हैं तथा रेलवे कर्मचारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया गया है।

इसके अतिरिक्त आश्रम एक्सप्रेस, कच्छ एक्सप्रेस, अला हज़रत एक्सप्रेस, अरावली एक्सप्रेस एवं लोकशक्ति एक्सप्रेस जैसी कुछ ट्रेनों में अलार्म चेन पुलिंग की घटनाएँ अपेक्षाकृत अधिक पाई गईं, जिन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

रेल प्रशासन एवं RPF यात्रियों से अपील करता है कि अलार्म चेन का उपयोग केवल आपात स्थिति में ही करें। अनावश्यक अलार्म चेन पुलिंग न केवल ट्रेन परिचालन को बाधित करता है, बल्कि अन्य यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा को भी प्रभावित करता है।