भारतीय रेल की पहली LNG ट्रेन का सफल संचालन

भारतीय रेल की पहली LNG ट्रेन का सफल संचालन

मण्डल रेल प्रबंधक, अहमदाबाद वेद प्रकाश ने 30 जनवरी को पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद स्थित इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो (ICD), साबरमती में भारतीय रेलवे की पहली एलएनजी-डीजल आधारित ड्यूल फ्यूल DEMU ट्रेन का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए इस अभिनव पहल की विस्तृत जानकारी दी। उन्होने बताया कि भारतीय रेल ने स्वच्छ, पर्यावरण अनुकूल एवं किफायती रेल परिचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय रेलवे में पहली बार डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) के ड्राइविंग पावर कार (DPC) में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) आधारित ड्यूल फ्यूल प्रणाली को सफलतापूर्वक अपनाया गया है।

इस योजना के अंतर्गत 1400 एचपी के दो DEMU DPC को डीजल + एलएनजी ड्यूल फ्यूल प्रणाली में परिवर्तित किया गया है, जिसमें लगभग 40 प्रतिशत तक डीजल के स्थान पर एलएनजी का उपयोग किया जा रहा है। इन दोनों परिवर्तित DPC पर 2000 किलोमीटर से अधिक का सफल फील्ड ट्रायल किया जा चुका है तथा वर्तमान में ये बिना किसी समस्या के नियमित यात्री सेवा में संचालित हो रहे हैं।

LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) ड्यूल फ्यूल प्रणाली के प्रमुख लाभ

1. पर्यावरणीय लाभ

इंजन से निकलने वाले प्रदूषकों में उल्लेखनीय कमी, विशेष रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और पार्टिकुलेट मैटर (PM) में कमी।

रेलवे मार्गों के आसपास वायु गुणवत्ता में सुधार तथा राष्ट्रीय पर्यावरणीय लक्ष्यों की पूर्ति में सहायता।

2. ईंधन लागत में कमी

एलएनजी, डीजल की तुलना में सस्ता है। आंशिक रूप से डीजल के स्थान पर एलएनजी के उपयोग से परिचालन लागत में उल्लेखनीय बचत होती है।

परीक्षण आंकड़ों के आधार पर एक DPC से लगभग ₹11.9 लाख प्रति वर्ष की बचत तथा एक 8-कोच DEMU रेक (2 DPC) से लगभग ₹23.9 लाख प्रति वर्ष की बचत संभव है।

3. परिचालन में फ्लेक्सिबिलिटी

ड्यूल फ्यूल इंजन, ईंधन की उपलब्धता के अनुसार डीजल और एलएनजी के बीच आसानी से स्विच कर सकते हैं, जिससे सेवा में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं होता।

4. प्रदर्शन में कोई कमी नहीं

ड्यूल फ्यूल प्रणाली इस प्रकार डिजाइन की गई है कि इंजन की शक्ति और विश्वसनीयता पारंपरिक डीजल इंजन के समान बनी रहती है, जिससे बेहतर प्रदर्शन के साथ-साथ ईंधन बचत और प्रदूषण में कमी सुनिश्चित होती है।

स्वीकृत डिजाइन के अनुसार DPC में लगभग 2200 लीटर क्षमता (लगभग 950 1000 किलोग्राम उपयोगी एलएनजी) का एलएनजी टैंक स्थापित किया गया है। एक बार पूर्ण भराव से 222 किलोमीटर के दैनिक संचालन के लिए पर्याप्त एलएनजी उपलब्ध हो जाता है, जिससे बार-बार ईंधन भरने की आवश्यकता कम होती है।

आरडीएसओ द्वारा उत्सर्जन परीक्षण एवं अंतिम स्वीकृतियों के पश्चात इस तकनीक को और अधिक विस्तार दिया जाएगा। अगले चरण में 8 और DEMU DPC को ड्यूल फ्यूल प्रणाली में परिवर्तित करने की योजना है, जिससे भारतीय रेल की स्वच्छ ऊर्जा, कम कार्बन उत्सर्जन और किफायती परिचालन के प्रति प्रतिबद्धता और सुदृढ़ होगी।