सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा 7वें राष्ट्रीय तंबाकू स्वास्थ्य सम्मेलन

रायबरेली।अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)रायबरेली के सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा 7वें राष्ट्रीय तंबाकू या स्वास्थ्य सम्मेलन (एनसीटीओएच)2026 का शुभारंभ 29 जनवरी 2026 को किया गया।जो कि1 फरवरी तक आयोजित किया जायेगा।सम्मेलन का विषय है तंबाकू या स्वास्थ्य: यह आपका चुनाव है।सम्मेलन की शुरुआत छह गहन प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशालाओं के साथ हुई,जिनका संचालन देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा किया गया।यह आयोजन भारत में साक्ष्य-आधारित तंबाकू नियंत्रण के प्रति एक सशक्त प्रतिबद्धता को दर्शाता है।प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशालाओं के उद्घाटन सत्र की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई।इसके पश्चात आयोजन अध्यक्ष डॉ. भोला नाथ द्वारा उद्घाटन संबोधन दिया गया,जिसमें उन्होंने सभी गणमान्य अतिथियों, प्रतिभागियों एवं संसाधन व्यक्तियों का स्वागत किया।उन्होंने सम्मेलन की थीम के बारे में जानकारी दी तथा दिन भर आयोजित होने वाली विभिन्न कार्यशालाओं का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।इसके उपरांत प्रो. डॉ. नीरज कुमारी,डीन,एम्स रायबरेली ने अपना उद्घाटन संबोधन दिया,जिसमें उन्होंने तंबाकू के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर विशेष बल दिया।डॉ.राणा जे. सिंह, डायरेक्टर, साउथ-ईस्ट एशिया, वाइटल स्ट्रेटेजीज़ ने तंबाकू को विभिन्न गैर-संचारी रोगों का सबसे महत्वपूर्ण एकल जोखिम कारक बताते हुए इसके नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।ले.कर्नल अखिलेश कुमार सिंह,उप निदेशक(प्रशासन)ने तंबाकू उद्योग की मानकीकृत एवं भ्रामक विपणन प्रथाओं जैसे समान रंग और समान आकार के विरुद्ध तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला,जो हानिकारक उत्पादों को सामान्य बनाती हैं।
कर्नल यू.एन.राय वित्तीय सलाहकार ने तंबाकू के कारण आम जनता पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ तथा इसके नियंत्रण हेतु सरकार की वित्तीय रणनीतियों पर अपने विचार साझा किए।कार्यक्रम का समापन आयोजन सचिव डॉ.सौरभ पॉल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।विभिन्न कार्यशालाओं के माध्यम से एकीकृत तंबाकू त्याग एवं रोकथाम,तंबाकू उद्योग की रणनीतियों का खुलासा,मौखिक कैंसर की जांच, राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम(NTCP) के अनुरूप जन-स्वास्थ्य अनुसंधान,वेलनेस काउंसलिंग तथा R और बिब्लियोमेट्रिक विश्लेषण का उपयोग कर डेटा-आधारित दृष्टिकोण से तंबाकू नियंत्रण कानूनों को सुदृढ़ करने पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।इंटरएक्टिव समूह गतिविधियों के दौरान तंबाकू सेवन के कारणों?जैसे तनाव प्रबंधन की कठिनाइयाँ, साथियों का प्रभाव और प्रचलित भ्रांतियाँ पर चर्चा की गई।साथ ही, तनाव से राहत, सामाजिक जुड़ाव और रोजगार सृजन जैसे कथित लाभों की तुलना तंबाकू से होने वाले सुविख्यात दुष्प्रभावों से की गई, जिनमें मौखिक कैंसर, समय से पहले बुढ़ापा, बांझपन, जीवन प्रत्याशा में कमी, कोविड-19 सहित संक्रमणों के प्रति बढ़ी संवेदनशीलता, नींद संबंधी समस्याएँ, कार्यक्षमता में गिरावट, जीवन की गुणवत्ता में कमी तथा अन्य नशों के प्रति बढ़ी संवेदनशीलता शामिल हैं।
सत्रों में समग्र समाधान प्रस्तुत किए गए, जिनमें विद्यालय स्वास्थ्य कार्यक्रम, COTPA अधिनियम पर शिक्षा, स्वस्थ मुकाबला रणनीतियों का प्रोत्साहन तथा डिजिटल तंबाकू त्याग उपकरणों का उपयोग शामिल रहा।इसके साथ ही जैव मनो सामाजिक मॉडल पर आधारित साक्ष्य-आधारित तंबाकू नियंत्रण रणनीतियाँ, 5 A?s पद्धति के माध्यम से व्यवहारिक परामर्श, फैगरस्ट्रॉम परीक्षण द्वारा निकोटीन निर्भरता का आकलन तथा पैच,गम और अन्य प्रणालियों सहित प्रथम-पंक्ति निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी के उपयुक्त उपयोग पर भी जोर दिया गया।तंबाकू छोड़ने के बाद निरंतर सहयोग और व्यवहार परिवर्तन की आवश्यकता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय,वाइटल स्ट्रेटेजीज़ तथा एम्स ऋषिकेश, भुवनेश्वर, बठिंडा और जम्मू सहित विभिन्न एम्स संस्थानों के विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय और वैश्विक दृष्टिकोण साझा किए।साथ ही, ओडिशा के राज्य तंबाकू नियंत्रण नोडल अधिकारी एवं जिपमर, पुदुचेरी के प्रतिनिधियों सहित भारत के 24 से अधिक राज्यों से आए प्रतिभागियों ने इन विचार-विमर्शों में सक्रिय रूप से भाग लिया।